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आदतन बदमाश धर्मेंद्र जांगड़े एक वर्ष के लिए जिलाबदर

कवर्धा/पंडरिया। कबीरधाम जिले के पंडरिया क्षेत्र के आदतन अपराधी एवं गुंडा बदमाश धर्मेंद्र जांगड़े के विरुद्ध जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे एक वर्ष के लिए जिलाबदर कर दिया है। जिला दंडाधिकारी कबीरधाम द्वारा जारी आदेश के अनुसार धर्मेंद्र जांगड़े को जिला कबीरधाम सहित सरहदी जिलों खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बेमेतरा और मुंगेली की सीमाओं से आगामी एक वर्ष तक निष्कासित किया गया है।

पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर जिले में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल तथा एसडीओपी पंडरिया भूपत सिंह धनेश्री के मार्गदर्शन में थाना पंडरिया पुलिस ने धर्मेंद्र जांगड़े के विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 एवं 5(ख) के तहत कार्रवाई का प्रतिवेदन जिला दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया था।

सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि धर्मेंद्र जांगड़े के विरुद्ध वर्ष 2014 से लेकर वर्तमान तक थाना पंडरिया एवं भोरमदेव में कई आपराधिक तथा प्रतिबंधात्मक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस एवं प्रशासन की पूर्व कार्रवाई के बावजूद उसके व्यवहार में सुधार नहीं आया तथा उसके कृत्यों से क्षेत्र में भय और असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा था। लोक व्यवस्था पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए जिला दंडाधिकारी ने जिलाबदर का आदेश पारित किया।

पुलिस के अनुसार धर्मेंद्र जांगड़े का नाम वर्ष 2023 में थाना पंडरिया की गुंडा बदमाश सूची में भी शामिल किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी गतिविधियों में कोई सुधार नहीं देखा गया। प्रशासन की इस कार्रवाई का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

दर्ज प्रमुख प्रकरण

धर्मेंद्र जांगड़े के विरुद्ध थाना पंडरिया में वर्ष 2014, 2022 और 2023 में मारपीट, गाली-गलौज एवं धमकी से संबंधित मामले दर्ज हैं। इसके अलावा वर्ष 2024 में थाना भोरमदेव में जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया था।

इसके अतिरिक्त उसके विरुद्ध विभिन्न वर्षों में धारा 107, 110, 151 सीआरपीसी तथा बीएनएसएस के अंतर्गत कई प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियां भी की गई हैं। प्रशासन का मानना है कि इन कार्रवाइयों के बावजूद उसके आचरण में सुधार नहीं होने के कारण जिलाबदर की कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।

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