कालूपुर रेलवे स्टेशन पर बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति से रूबरू हुए छत्तीसगढ़ के पत्रकार

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना अंतिम चरण की ओर, 357 किमी वायाडक्ट और 452 किमी पियर का निर्माण पूरा

एनएचएसआरसीएल के उप मुख्य परियोजना प्रबंधक मनोज गुप्ता ने दी परियोजना की तकनीकी और निर्माण प्रगति की जानकारी

अहमदाबाद, 20 जुलाई 2026। गुजरात अध्ययन दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने सोमवार को अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन का भ्रमण कर देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के उप मुख्य परियोजना प्रबंधक मनोज गुप्ता ने पत्रकारों को परियोजना की प्रगति, निर्माण तकनीक, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी।
मनोज गुप्ता ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि भारत के परिवहन क्षेत्र में तकनीकी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग, विश्वस्तरीय अधोसंरचना और आर्थिक विकास के नए अवसरों का आधार बनेगी।
उन्होंने बताया कि 508 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। 13 जुलाई 2026 तक परियोजना में 357 किलोमीटर वायाडक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) और 452 किलोमीटर पियर (स्तंभ) का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे परियोजना के प्रमुख सिविल कार्य निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं।

17 नदी पुलों का निर्माण पूरा
मनोज गुप्ता ने बताया कि परियोजना के तहत अब तक 17 नदी पुल, 5 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल और 14 स्टील पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनका निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों और अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर किया गया है, जिससे हाई स्पीड ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।
ध्वनि नियंत्रण के लिए लगाए जा रहे नॉइज बैरियर
हाई स्पीड ट्रेन संचालन के दौरान ध्वनि प्रभाव को कम करने के लिए परियोजना में विशेष व्यवस्था की गई है। करीब 297 किलोमीटर लंबे मार्ग पर छह लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाए जा चुके हैं। इससे आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
ट्रैक निर्माण भी तेज गति से जारी
परियोजना के ट्रैक निर्माण की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 212 किलोमीटर आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा हो चुका है। करीब 200 किलोमीटर ट्रैक स्लैब तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 88 किलोमीटर ट्रैक स्लैब बिछाने के बाद उसमें सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (सीएएम) इंजेक्शन का कार्य पूरा किया गया है।
यह तकनीक हाई स्पीड रेल ट्रैक को मजबूती, स्थिरता और लंबी अवधि तक सुरक्षित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विद्युत व्यवस्था का कार्य प्रगति पर
उन्होंने बताया कि हाई स्पीड रेल के लिए विद्युत व्यवस्था भी तेजी से विकसित की जा रही है। अब तक 8,900 से अधिक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) मस्त लगाए जा चुके हैं, जो लगभग 199 किलोमीटर मुख्य वायाडक्ट क्षेत्र को कवर कर रहे हैं।
सुरंग निर्माण में बड़ी उपलब्धियां
मनोज गुप्ता ने बताया कि गुजरात के वलसाड जिले में स्थित एकमात्र पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं महाराष्ट्र के पालघर जिले में बनने वाली सात पर्वतीय सुरंगों में से तीन सुरंगों का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक हासिल किया जा चुका है।
मुंबई क्षेत्र में बनने वाली 21 किलोमीटर लंबी सुरंग परियोजना को सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग कार्यों में शामिल किया गया है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) से शिलफाटा के बीच बनने वाली इस सुरंग में 5 किलोमीटर खुदाई न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से पूरी हो चुकी है। शेष हिस्से में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से कार्य किया जाएगा।
तीन डिपो में होगा बुलेट ट्रेनों का रखरखाव
परियोजना के अंतर्गत गुजरात के साबरमती और सूरत तथा महाराष्ट्र के ठाणे में तीन प्रमुख रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं। यहां बुलेट ट्रेनों के रखरखाव, निरीक्षण और तकनीकी सेवाओं की व्यवस्था होगी।
सभी 12 स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी
उन्होंने बताया कि परियोजना के सभी 12 बुलेट ट्रेन स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। गुजरात के आठों स्टेशनों पर फिनिशिंग कार्य तेजी से चल रहा है। इन स्टेशनों में आधुनिक यात्री सुविधाएं, डिजिटल सूचना प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, एस्केलेटर, लिफ्ट और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था
मनोज गुप्ता ने कहा कि परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जापान की शिंकानसेन हाई स्पीड रेल प्रणाली के अनुभवों के आधार पर सिग्नलिंग, संचार, ट्रैक और संचालन प्रणाली तैयार की जा रही है। भूकंप जैसी आपात परिस्थितियों में ट्रेन को स्वतः रोकने वाली आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी इसमें शामिल है।
उद्योग, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना केवल मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र के औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को नई गति देगी। तेज परिवहन व्यवस्था से निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
अध्ययन दौरे के दौरान पत्रकारों ने कालूपुर रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सुरक्षा मानकों की जानकारी प्राप्त की।
मनोज गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना भारत के अधोसंरचना विकास में ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी और देश को विश्वस्तरीय हाई स्पीड रेल नेटवर्क वाले देशों की श्रेणी में शामिल करेगी।


