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आरक्षण की समीक्षा और आर्थिक आधार को महत्व देने की मांग, 20 समाजों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे

कवर्धा सवर्ण समाज ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; कहा—किसी वर्ग के अधिकारों का विरोध नहीं, समान अवसर और सामाजिक समरसता के साथ नीति में सुधार जरूरी

कवर्धा। आरक्षण व्यवस्था को लेकर देशभर में चल रही बहस अब कवर्धा तक पहुंच गई है। शुक्रवार को कवर्धा सवर्ण समाज के नेतृत्व में 20 अलग-अलग समाजों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। समाज ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर, वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने और व्यवस्था में समयानुकूल सुधार की मांग रखी। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय और समान अवसर का संतुलन स्थापित करना है।

जंतर-मंतर के आंदोलन से जुड़ी मांगें

कलेक्ट्रेट में सौंपे गए ज्ञापन में देश के विभिन्न हिस्सों में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और सुधार को लेकर चल रही बैठकों, जनजागरण अभियानों और शांतिपूर्ण आंदोलनों का उल्लेख किया गया। इसमें 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में सुधार एवं समान अवसर की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन का भी संदर्भ दिया गया है। समाज का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।

आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर जोर

ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रभावों के आधार पर व्यापक समीक्षा की मांग की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की वास्तविक स्थिति को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में उचित महत्व देने की बात कही गई है। समाज ने मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, शुल्क में राहत, छात्रावास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाए जाएं, ताकि आर्थिक स्थिति किसी विद्यार्थी के भविष्य में बाधा न बने।

लाभार्थियों की भी हो समय-समय पर समीक्षा

ज्ञापन में आरक्षण एवं संबंधित सुविधाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद और पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सुधार की मांग की गई है। लंबे समय से आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके परिवारों के संबंध में लाभ की निरंतरता की समय-समय पर समीक्षा करने की व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी गई।

विशेषज्ञ समिति और संवाद की मांग

समाज ने विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण संबंधी प्रावधानों के समयानुकूल मूल्यांकन, सभी सामाजिक वर्गों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से व्यापक संवाद तथा आरक्षण के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों के अध्ययन के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की है।

ज्ञापन में सामाजिक समरसता और संवैधानिक भावना बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सभी पक्षों को साथ लेकर आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक विचार-विमर्श होगा और समान अवसर से जुड़े मुद्दों का संवैधानिक एवं न्यायसंगत समाधान निकलेगा।

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