राजपुर का सामुदायिक चेक डेम बना किसानों के लिए वरदान, जल संरक्षण से बढ़ी खेती और आय

राजपुर का सामुदायिक चेक डेम बना किसानों के लिए वरदान, जल संरक्षण से बढ़ी खेती और आय

रायपुर, 25 जुलाई 2026। दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड की ग्राम पंचायत राजपुर में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत निर्मित सामुदायिक चेक डेम जल संरक्षण, रोजगार सृजन और कृषि समृद्धि का सफल मॉडल बनकर सामने आया है। इस परियोजना से वर्षा जल का संरक्षण होने के साथ किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है, जिससे खेती और आय दोनों में वृद्धि हुई है।
भागवत के खेत के समीप बने इस चेक डेम के निर्माण के लिए 16.02 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, जबकि निर्माण पर 15.69 लाख रुपये खर्च किए गए। इसमें 2.79 लाख रुपये मजदूरी और 12.55 लाख रुपये सामग्री पर व्यय हुए। निर्माण कार्य से 1671 मानवदिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला और पलायन में कमी आई।
10 हजार घनमीटर से अधिक जल संरक्षण क्षमता
12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की 10,080 घनमीटर जल संरक्षण क्षमता है। इससे वर्षा का पानी अब बहकर नष्ट होने के बजाय संरक्षित हो रहा है, जिससे आसपास के कुएं, हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर बढ़ा है तथा गर्मी के मौसम में भी पानी की उपलब्धता बेहतर बनी रहती है।
10 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ
इस परियोजना से लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। किसान अब खरीफ के साथ रबी और सब्जी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई से उत्पादन बढ़ा है, खेती की लागत घटी है और किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
तकनीकी सहायक पूजा पटेल के अनुसार चेक डेम का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है। यह संरचना जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, सूखे की स्थिति में राहत और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि चेक डेम बनने के बाद खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है और समय पर सिंचाई मिलने से फसल खराब होने की चिंता काफी कम हो गई है। राजपुर का यह सामुदायिक चेक डेम जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का प्रेरक मॉडल बन गया है।



