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UCC ड्राफ्टिंग तेज, कुलपतियों ने जमीनी सर्वे और शोध पर दिया जोर

विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे मुद्दों पर विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने रखे सुझाव

रायपुर, 7 सितंबर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जन-उपयोगी बनाने के लिए गठित समिति ने जन-परामर्श और विशेषज्ञों से चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील विषयों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपने सुझाव दिए।

बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या ज्योति रानी सिंह की मौजूदगी में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया।

HNLU कुलपति ने दिया प्रेजेंटेशन

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर विवेकानंदन ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए UCC से जुड़े विस्तृत सुझाव रखे। उन्होंने मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत मसौदा तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से तकनीकी एवं कानूनी सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में नागरिकों के लिए समान नियम तय करना और सभी को समान अधिकार उपलब्ध कराना है। खासतौर पर महिलाओं के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करना इसका महत्वपूर्ण पक्ष है।

हर जिले में हो जमीनी सर्वे

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने UCC के मसौदे को शोध आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और विधि विशेषज्ञों तथा शोधकर्ताओं के सुझावों को शामिल करने की बात कही।

उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जमीनी सर्वे और आम जनता से सीधे फीडबैक लेने का सुझाव दिया, ताकि प्रस्तावित कानून छत्तीसगढ़ की वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार हो सके। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी अपने सुझाव रखे।

समिति बोली- सुझावों को ड्राफ्ट में देंगे प्राथमिकता

समिति के सदस्यों एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह ने शिक्षाविदों के सुझावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्राप्त सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट में प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा।

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