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13.60 लाख का पशु रेस्क्यू वाहन 8 महीने से खड़ा, चालक-डीजल नहीं मिला तो बचाव कार्य शून्य

कवर्धा। सड़क हादसों में घायल मवेशियों को तत्काल उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने के उद्देश्य से विधायक निधि से 13 लाख 60 हजार रुपए की लागत से खरीदा गया पशु रेस्क्यू वाहन पिछले करीब आठ महीने से खड़ा है। वाहन का लोकार्पण 31 दिसंबर 2025 को बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर के पास किया गया था, लेकिन नियमित संचालन के लिए चालक और डीजल की व्यवस्था नहीं होने से अब तक एक भी घायल पशु का रेस्क्यू नहीं हो सका है।

वाहन खरीदने का उद्देश्य दुर्घटनाग्रस्त और घायल मवेशियों को मौके से सुरक्षित उठाकर पशु चिकित्सालय पहुंचाना था। उपचार के बाद उन्हें गोशाला या पशु शेल्टर तक पहुंचाने की भी योजना थी। लेकिन लोकार्पण के बाद संचालन के लिए जरूरी संसाधन नहीं मिलने से लाखों रुपए का वाहन उपयोग के बजाय खड़ा है।

घायल मवेशी घंटों सड़क किनारे पड़े रहते हैं

कवर्धा शहर और आसपास की सड़कों पर आए दिन मवेशियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती हैं। हादसे के बाद कई बार घायल पशु घंटों सड़क किनारे पड़े रहते हैं। समय पर रेस्क्यू वाहन नहीं मिलने से उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है। ऐसे में उपलब्ध रेस्क्यू वाहन का उपयोग नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

चालक के साथ दो कर्मचारियों की जरूरत

डॉ. देवांगन के अनुसार, वाहन के नियमित संचालन के लिए चालक या सहायक चालक के साथ कम से कम दो अन्य कर्मचारियों की जरूरत होगी। दुर्घटना में घायल मवेशियों को सुरक्षित तरीके से उठाकर वाहन में रखने के लिए कर्मचारियों की भूमिका अहम होगी। इसके अलावा डीजल और वाहन के नियमित रखरखाव के लिए भी बजट की आवश्यकता होगी।

संस्था या एनजीओ के सहयोग से संचालन की तैयारी

विभाग अब किसी संस्था अथवा गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से वाहन का संचालन कराने की संभावनाएं तलाश रहा है। सवाल यह है कि जब 13.60 लाख रुपए खर्च कर वाहन खरीदा गया तो उसके नियमित संचालन के लिए चालक, ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई। समय पर व्यवस्था होने पर यह वाहन अब तक कई घायल मवेशियों को उपचार दिलाने में उपयोगी साबित हो सकता था।

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