
एकता नगर (गुजरात)।
कभी जहां की अर्थव्यवस्था कृषि और पशुपालन तक सीमित थी, वहां आज इलेक्ट्रिक बसें दौड़ रही हैं, महिलाएं ई-रिक्शा चला रही हैं, स्थानीय युवा पर्यटकों को गाइड कर रहे हैं और गांवों के लोग होटल से लेकर पर्यटन सुविधाओं तक में रोजगार पा रहे हैं। सरदार सरोवर बांध और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के विकास ने नर्मदा के किनारे बसे इस क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी है। एकता नगर अब केवल दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा देखने आने वाले पर्यटकों का गंतव्य नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यटन, हरित विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को रोजगार से जोड़ने का एक ऐसा मॉडल बन रहा है, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है।

पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित गुजरात अध्ययन दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधिमंडल को एकता नगर के विकास की अवधारणा और यहां हुए बदलावों की जानकारी देते हुए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एरिया डेवलपमेंट एंड टूरिज्म गवर्नेंस अथॉरिटी (SOUADTG), एकता नगर के अतिरिक्त कलेक्टर श्री नारायण मधु ने बताया कि पूरे क्षेत्र का विकास एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन के साथ नागरिक सुविधाओं, पर्यावरण, परिवहन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को एकीकृत करना है।

सरदार सरोवर से शुरू हुई विकास की कहानी
एकता नगर के विकास की कहानी सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ी है। श्री मधु के अनुसार, बांध परियोजना के कारण क्षेत्र में बड़े भू-भाग की उपलब्धता हुई, जो आगे चलकर पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी। सामान्यतः किसी नए पर्यटन केंद्र को विकसित करने में भूमि की उपलब्धता और अधिग्रहण बड़ी चुनौती होती है, लेकिन यहां बांध परियोजना के कारण पर्याप्त भूमि उपलब्ध थी, जिसका उपयोग पर्यटन और संबंधित आधारभूत संरचना के विकास में किया गया।
सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन वर्ष 2017 में हुआ। यह परियोजना गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से जुड़ी है। इससे गुजरात और राजस्थान को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता है, जबकि चारों राज्यों को विद्युत का लाभ मिलता है। परियोजना से करीब 18 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1450 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर ने इस पूरे क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया।

सरदार सरोवर बांध के सामने विकसित की गई 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आज एकता नगर की वैश्विक पहचान बन चुकी है। यह प्रतिमा भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय एकता और दूरदर्शी नेतृत्व को समर्पित है।
प्रतिमा के निर्माण के लिए विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट का गठन किया गया। देशभर की जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘लोहा और मिट्टी’ अभियान चलाया गया। विभिन्न राज्यों से एकत्रित लोहा प्रतिमा की नींव में उपयोग किया गया, जबकि मिट्टी से एकता की दीवार का निर्माण किया गया।
31 अक्टूबर 2018 को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के उद्घाटन के बाद एकता नगर ने देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बनाई। इसके बाद क्षेत्र को केवल एक प्रतिमा तक सीमित न रखते हुए यहां क्रमशः नए पर्यटन आकर्षण विकसित किए गए। वर्तमान में यहां करीब 27 प्रमुख आकर्षण हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ाने की योजना है।
एकता नगर और आसपास के 19 गांवों के पर्यटन एवं नागरिक विकास के लिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एरिया डेवलपमेंट एंड टूरिज्म गवर्नेंस अथॉरिटी (SOUADTG) का गठन किया गया है। प्राधिकरण का उद्देश्य पर्यटन केंद्रित विकास के साथ नागरिक सुविधाओं, आधारभूत संरचना, नियोजन और प्रशासन को एकीकृत करना है।
श्री मधु के अनुसार, बिना दीर्घकालिक योजना के पर्यटन स्थलों का विकास होने पर बाद में यातायात, भीड़ और सुरक्षा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए एकता नगर में शुरुआत से ही नियोजित विकास पर जोर दिया गया। पर्यटन से होने वाली आय का उपयोग क्षेत्र के आगे के विकास में किया जा सके, इसके लिए स्थायी वित्तीय मॉडल विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
पर्यटन ने बदली स्थानीय अर्थव्यवस्था
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के विकास का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। पहले क्षेत्र के अधिकांश परिवार कृषि और पशुपालन पर निर्भर थे। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के बाद स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
आज एक ही परिवार के पति और पत्नी अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। पति किसी होटल या पर्यटन सुविधा में कार्यरत है तो पत्नी ई-रिक्शा चलाकर आय अर्जित कर रही है। इस बदलाव ने स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
पर्यटन गाइड, बस चालक, सुविधा संचालक, हाउसकीपिंग, सफाई, निर्माण, पशु देखभाल, अग्नि एवं सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। होटल, टूर ऑपरेटर और स्ट्रीट वेंडर भी स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं।
स्थानीय युवाओं को पर्यटन उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। CSR पहल के तहत संचालित केंद्र में अब तक 224 लोगों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें ड्राइविंग, टूरिस्ट गाइड, ब्यूटी पार्लर, फ्रंट डेस्क तथा खाद्य एवं पेय सेवा जैसे क्षेत्रों का प्रशिक्षण शामिल है। इसका उद्देश्य पर्यटन से पैदा होने वाले रोजगार का अधिकतम लाभ स्थानीय युवाओं को दिलाना है।
एकता नगर के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। एकता नर्सरी का संचालन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से किया जा रहा है। इससे स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हरित परिवहन और विश्वस्तरीय सुविधाओं पर जोर
एकता नगर रेलवे स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया गया है। पर्यटकों की आवाजाही के लिए 55 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा ई-रिक्शा, ई-बाइक, इलेक्ट्रिक किक स्कूटर और इलेक्ट्रिक गोल्फ कार जैसी पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
एकता नगर की विशेष पहचान बन चुकी गुलाबी ई-रिक्शा सेवा का संचालन महिलाएं करती हैं। इस पहल ने महिलाओं को रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर दिया है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विभिन्न स्थानों पर चार्जिंग सुविधाएं विकसित की गई हैं। स्मार्ट बस स्टॉप, पैदल पथ, साइकिल ट्रैक और अन्य सुगम्य सुविधाओं के जरिए वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बच्चों सहित सभी वर्गों के पर्यटकों के लिए आवागमन को सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।
एकता नगर के विकास में हरित क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। शूलपाणेश्वर अभयारण्य के प्राकृतिक परिवेश के साथ-साथ एकता नगर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है। श्री मधु के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में करीब 40 लाख पौधे लगाए गए हैं। एकता नर्सरी, मियावाकी वन और शहरी घने वन जैसे प्रयोगों के जरिए सीमित क्षेत्र में अधिक हरियाली विकसित की जा रही है। गर्मियों में बंजर दिखाई देने वाली पहाड़ियों पर भी सघन पौधारोपण किया जा रहा है।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप आवास और आतिथ्य क्षेत्र का भी तेजी से विस्तार हुआ है। वर्तमान में करीब 3,000 कमरों की आवासीय क्षमता उपलब्ध है तथा तीन, चार और पांच सितारा श्रेणी के होटल और अन्य आतिथ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। दिसंबर के पीक पर्यटन सीजन में एकता नगर में प्रतिदिन 80 हजार से एक लाख तक पर्यटकों के पहुंचने की स्थिति बनती है। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए आठ प्रमुख पार्किंग सुविधाएं विकसित की गई हैं। आवश्यकता के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों के साथ गुजरात राज्य परिवहन की बसों का भी उपयोग किया जाता है।
श्री मधु ने बताया कि पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड, सूचना केंद्र, टिकटिंग काउंटर, रेडियो सेवा और व्यवस्थित साइनेज की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए व्हीलचेयर और बेबी स्ट्रोलर जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
एकता नगर का विकास अभी निरंतर जारी है। क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान के तहत आने वाले समय में विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और नए पर्यटन आकर्षण विकसित किए जाएंगे। लक्ष्य ऐसा समग्र पर्यटन गंतव्य तैयार करना है, जहां पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक परिवहन, स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियां एक साथ आगे बढ़ें।
सरदार सरोवर की भूमि पर खड़ी 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने जहां भारत की एकता का संदेश दुनिया तक पहुंचाया है, वहीं उसके आसपास विकसित होता एकता नगर यह साबित कर रहा है कि सही नियोजन के साथ पर्यटन किसी क्षेत्र के केवल भूगोल को नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगी को भी बदल सकता है।



