भोरमदेव में कांवड़ियों से कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल, व्यवस्था पर उठे सवाल
अमरकंटक से करीब 150-200 किमी पैदल चलकर पहुंचे थे श्रद्धालु, मंदिर की सीढ़ियों पर पुलिस की सख्ती का आरोप
https://youtube.com/shorts/TUjeUJKKZBA?si=ncc5WroPOk7OILu3
कवर्धा। प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से कथित दुर्व्यवहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मंदिर की व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर पुलिसकर्मी और राजस्व कर्मचारी मंदिर की सीढ़ियों पर मौजूद कांवड़ियों को पीछे हटाते और नीचे की ओर धकेलते नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया गया है कि संबंधित कांवड़िए अमरकंटक से पवित्र जल लेकर करीब 150 से 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोरमदेव पहुंचे थे। लंबी पदयात्रा के बाद श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने मंदिर पहुंचे। इसी दौरान मंदिर की सीढ़ियों पर सामने आए वीडियो ने व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।
भीड़ नियंत्रण या श्रद्धालुओं के साथ सख्ती?
धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद सवाल उठ रहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया कितनी संवेदनशील थी। प्रशासन के सामने बैरिकेडिंग, कतार व्यवस्था, प्रवेश-निकास के अलग मार्ग और अतिरिक्त बल की तैनाती जैसे विकल्प भी होते हैं।
पुलिस प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग
वायरल वीडियो को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि वीडियो कब का है, उस समय मंदिर में कितनी भीड़ थी और श्रद्धालुओं को पीछे हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। यदि भीड़ के कारण किसी अप्रिय स्थिति की आशंका थी तो प्रशासन को पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि किसी कर्मचारी या पुलिसकर्मी ने निर्धारित सीमा से अधिक सख्ती की है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।
आस्था के साथ व्यवस्था भी जरूरी
भोरमदेव छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कांवड़ यात्रा और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने की भी जिम्मेदारी है।
वायरल वीडियो ने फिलहाल एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या भीड़ नियंत्रण के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ सख्ती जरूरी है या व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सुरक्षा के साथ आस्था का सम्मान भी बना रहे? पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
नोट: वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।


