पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अशोक साहू के खिलाफ चुनावी आरोप खारिज

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अशोक साहू के खिलाफ चुनावी आरोप खारिज
12 साल बाद पूर्व विधायक अशोक साहू को बड़ी कानूनी राहत, सुप्रीम कोर्ट तक नहीं टिके आरोप
रिकॉल आवेदन भी खारिज, कवर्धा का चर्चित चुनावी मामला समाप्त
कवर्धा। वर्ष 2013 के कवर्धा विधानसभा चुनाव से जुड़ा बहुचर्चित कानूनी विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा भाजपा के पूर्व विधायक अशोक साहू के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी। लगभग 12 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में दायर रिकॉल आवेदन को भी खारिज कर दिया है।
इस फैसले के बाद वर्ष 2013 में कवर्धा विधानसभा क्षेत्र की जनता द्वारा दिए गए जनादेश पर न्यायिक स्तर पर भी अंतिम मुहर लग गई है। लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय रहे इस मामले में अदालतों ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी तथ्यों के आधार पर आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
2013 चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कवर्धा सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक साहू विजयी घोषित हुए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अकबर ने चुनाव खर्च सीमा उल्लंघन और कथित भ्रष्ट आचरण सहित कई आरोप लगाते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। इसके बाद मामला वर्षों तक न्यायालयों में विचाराधीन रहा और राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बना रहा।
हाईकोर्ट ने कहा — पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव खर्च और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों से जुड़े कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद वर्ष 2016 में चुनाव याचिका खारिज कर दी थी। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सीडी कानूनी मानकों के अनुरूप प्रमाणित नहीं किए जा सके तथा चुनाव परिणाम प्रभावित होने संबंधी दावे पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हो पाए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपील समाप्त की
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मोहम्मद अकबर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने 12 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव याचिका पहले ही निरस्त की जा चुकी है, इसलिए आगे सुनवाई का औचित्य नहीं बचता। इसके बाद अदालत ने अपील समाप्त कर दी।
इसके पश्चात पूर्व आदेश वापस लेने के लिए रिकॉल आवेदन दायर किया गया, जिसे 22 मई 2026 को भी खारिज कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेश वापस लेने के लिए कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
क्षेत्र में फिर तेज हुई राजनीतिक चर्चा
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे जनादेश और न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक चले इस मामले का अब कानूनी रूप से पटाक्षेप हो चुका है।
अशोक साहू ने जताया जनता के प्रति आभार
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक साहू ने कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन और विश्वास उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे आगे भी क्षेत्र के विकास और जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।



