उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी, 31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने के निर्देश

ओ.पी. चौधरी बोले- पौधे लगाना ही नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर, 12 जुलाई। आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उद्योगों से वृक्षारोपण को जनभागीदारी के साथ सफल बनाने और लगाए गए पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री श्री चौधरी ने राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों के साथ मानसून-2026 के दौरान संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कार्य कर रही है और पर्यावरणीय मानकों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी और सभी उद्योगों को समयबद्ध तरीके से पोर्टल पर जानकारी दर्ज करनी होगी।
उन्होंने उद्योगों से पीपल, नीम, शिरीष, आम, कटहल सहित स्थानीय और दीर्घायु प्रजातियों के पौधे लगाने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और संरक्षण सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया।
बैठक में बताया गया कि नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पहले लगाए गए करीब 70 हजार पौधों के अलावा अगले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं सेंध लेक के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो चुका है, जिससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। झील के मध्य स्थित तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से करीब 25 हजार पौधे लगाकर प्राकृतिक बर्ड आइलैंड विकसित किया जा रहा है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री अंकित आनंद ने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 90 प्रतिशत है। इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसे उद्योगों की सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में कम से कम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा परिसर के 33 प्रतिशत क्षेत्र में त्रि-स्तरीय ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। उन्होंने पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के उपयोग और ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली को नियमित रूप से संचालित रखने के भी निर्देश दिए।
बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।




