कुपोषण के खिलाफ आईएमए और प्रशासन की पहल, 30 बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य का उठाया जिम्मा

डॉक्टर्स डे पर 15 कुपोषित बच्चों को लिया गोद, नियमित निगरानी और उपचार से मिलेगा नया जीवन
रायपुर, 12 जुलाई। छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति अभियान को जनभागीदारी का मजबूत साथ मिल रहा है। सारंगढ़ विकासखंड में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त पहल से कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। हाल ही में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 30 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनके उपचार और पोषण की जिम्मेदारी तय की गई।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर आईएमए की जिला इकाई ने सेवा का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए ग्राम छुहीपाली के 15 कुपोषित बच्चों को गोद लेने का निर्णय लिया। आईएमए के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम इन बच्चों के इलाज, आवश्यक दवाइयों और विशेष पोषण आहार का पूरा खर्च वहन करेगी।
सारंगढ़ विकासखंड में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर में कुल 30 कुपोषित बच्चों की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गहन जांच की गई। जिला चिकित्सालय की शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण (एसएएम) के लक्षण पाए गए, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें निरंतर चिकित्सकीय देखभाल मिल सके।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सतत निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक सप्ताह बच्चों के वजन और शारीरिक विकास की निगरानी करेंगी। वहीं एक माह बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आईएमए की संयुक्त टीम दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण कर बच्चों की प्रगति का आकलन करेगी।
इस पहल को सफल बनाने में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ), ईएनटी विशेषज्ञ, जन औषधि केंद्र एवं आशा निकेतन के संचालक तथा एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला प्रशासन का मानना है कि सरकार, चिकित्सकों और समाज की साझी भागीदारी से कुपोषण के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।


