डिजिटल सुशासन से बदल रहा छत्तीसगढ़, 435 प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला
रायपुर, 12 जुलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से प्रदेश को देश के अग्रणी डिजिटल गवर्नेंस राज्यों में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 435 प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य केवल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, किसानों, उद्यमियों और निवेशकों तक सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सुशासन सरकार की कार्यशैली का मूल आधार है और प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक निवेश, पंजीयन व्यवस्था और डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए गए हैं। इनसे सरकारी प्रक्रियाएं तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनी हैं तथा नागरिकों का समय और आर्थिक संसाधनों की बचत हो रही है।
डिजिटल गवर्नेंस से बदली कार्यप्रणाली
राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन कर विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की है। अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फाइलों के निस्तारण और योजनाओं की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी भरोसे का माध्यम
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेश के नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वर्तमान में इस व्यवस्था से 42 विभागों के करीब 8 हजार अधिकारी जुड़े हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है। प्रत्येक शिकायत की ऑनलाइन ट्रैकिंग और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था ने इसे सरकार और जनता के बीच भरोसे का मजबूत माध्यम बना दिया है।
‘सेवा सेतु’ से 520 सेवाएं एक ही मंच पर
राज्य सरकार के ‘सेवा सेतु’ पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रदेशभर के 16,726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख का निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
निवेश और पंजीयन व्यवस्था हुई आसान
सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू कर उद्योगों के लिए अनुमतियों की प्रक्रिया को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाया है। वहीं संपत्ति पंजीयन व्यवस्था में ऑनलाइन भुगतान, दस्तावेज खोज, डिजिटल नकल और ‘सुगम’ ऐप जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से संपत्ति रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर नागरिकों को राहत भी दी है। नवा रायपुर में देश का पहला स्मार्ट पंजीयन कार्यालय शुरू किया गया है, जहां रजिस्ट्री की प्रक्रिया 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है।
भूमि सुधारों के लिए मिला 598 करोड़ का विशेष अनुदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना और एग्रीस्टैक जैसी पहलों से भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ी है। भूमि सुधार और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को 598 करोड़ रुपये का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन की यह निरंतर प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करेगी तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


