G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhINDIAKoriyaखास-खबर

जीराफूल चावल ने बनाई नई पहचान, एफपीओ मॉडल से किसानों को मिल रहा बेहतर बाजार

कोरिया। जिले का पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल अब प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के मॉडल से नई पहचान बना रहा है। जिले में 832 किसान प्राकृतिक खेती पद्धति से जीराफूल धान का उत्पादन कर रहे हैं। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की पहल से उत्पादन के साथ-साथ ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और विपणन पर भी जोर दिया जा रहा है।

कृषि विभाग के उप संचालक राजेश भारती ने बताया कि कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में किसान जीराफूल धान की खेती में जीवामृत और बीजामृत जैसे जैव आधारित इनपुट का उपयोग कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित चावल को पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन के साथ बाजार तक पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

खेत से बाजार तक एफपीओ बना मजबूत कड़ी

सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित के माध्यम से जीराफूल चावल के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन को बढ़ावा दिया जा रहा है। एफपीओ से किसानों को सामूहिक रूप से बाजार तक पहुंच बनाने और उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

प्राकृतिक खेती से मूल्य संवर्धन तक

प्राकृतिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, प्रमाणन और आकर्षक पैकेजिंग को एफपीओ के माध्यम से बाजार से जोड़कर जीराफूल चावल के लिए खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला तैयार की जा रही है। कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कोरिया के जीराफूल धान की प्राकृतिक खेती और एफपीओ मॉडल से जुड़े प्रयासों की सराहना की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी कोरिया के किसानों के प्रयासों की सराहना की है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती, जैव-इनपुट निर्माण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और एफपीओ के माध्यम से विपणन के संबंध में लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे कोरिया के पारंपरिक जीराफूल चावल को नए बाजार और बेहतर मूल्य की संभावनाएं मिल रही हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page