दशकों का अंधेरा छंटा, नियद नेल्लानार योजना से जगमगाए नारायणपुर के वनांचल गांव

मोहन्दी और मसपुर के 45 परिवारों के घर पहली बार पहुंची बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिलेगी नई दिशा
रायपुर, 12 जुलाई। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल में बसे ग्राम मोहन्दी और मसपुर के आदिवासी परिवारों के जीवन में वर्षों बाद रोशनी आई है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना’ के तहत इन गांवों में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा समाप्त हो गई। अब तक लालटेन और ढिबरी के सहारे जीवन बिताने वाले परिवारों के घरों में बिजली के बल्ब जलने से पूरे गांव में उत्साह का माहौल है।
घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन गांवों तक बिजली पहुंचाना बड़ी चुनौती था। इसके बावजूद जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) तथा निर्माण एजेंसी एम/एस माँ शारदा ने निर्धारित समय सीमा में विद्युत लाइन विस्तार का कार्य पूरा कर सफलता हासिल की।
योजना के तहत ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा और बीचपारा में लगभग 61.79 लाख रुपए की लागत से बिजली विस्तार कार्य किया गया, जिससे 40 परिवारों को पहली बार विद्युत सुविधा मिली। वहीं ग्राम मसपुर के गुडरापारा में 22.42 लाख रुपए की लागत से कार्य पूरा कर 5 परिवारों के घरों तक बिजली पहुंचाई गई। इस प्रकार कुल 84.21 लाख रुपए की लागत से 45 परिवारों के जीवन में उजाला आया।
बिजली पहुंचने से अब इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे। बच्चे रात में बेहतर रोशनी में पढ़ाई कर सकेंगे, मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य घरेलू विद्युत उपकरणों का उपयोग संभव होगा। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में भी सुधार आएगा तथा स्थानीय स्तर पर सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसाय जैसे स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
ग्रामीणों ने वर्षों बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देखकर खुशी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग का आभार जताया। उनका कहना है कि यह उनके जीवन का ऐतिहासिक और यादगार पल है।
राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ वनांचल के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। प्रशासन का लक्ष्य जिले के अन्य वंचित और दुर्गम गांवों तक भी चरणबद्ध तरीके से बिजली सहित सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।


