
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों से पारित किया जाना एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय एमएसएमई एवं श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि देश के आर्थिक विकास, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में यह क्षेत्र प्रमुख आधार बनेगा।
उन्होंने बताया कि उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर अब 9 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जिनसे करीब 40 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। एमएसएमई का देश की अर्थव्यवस्था में करीब 31 प्रतिशत और निर्यात में 50 प्रतिशत योगदान है। उद्यम पंजीकरण की संख्या 1 अप्रैल 2023 के करीब 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9 करोड़ से अधिक हो गई है।
निवेश और कारोबार की सीमा बढ़ाई गई
वर्ष 2020 में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के बीच अंतर समाप्त कर एमएसएमई की नई समग्र श्रेणी व्यवस्था लागू की गई थी। वर्ष 2025 में निवेश सीमा को बढ़ाकर सूक्ष्म उद्यमों के लिए 2.5 करोड़ रुपये, लघु उद्यमों के लिए 25 करोड़ रुपये और मध्यम उद्यमों के लिए 125 करोड़ रुपये किया गया। इसी तरह कारोबार की सीमा क्रमशः 10 करोड़, 100 करोड़ और 500 करोड़ रुपये की गई। इससे उद्यमों को निवेश बढ़ाने, कारोबार विस्तार और तकनीक अपनाने में मदद मिली है।
एमएसएमई को 38 लाख करोड़ से अधिक का ऋण
एमएसएमई के लिए संस्थागत वित्त और बैंक ऋण की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार ने लगातार काम किया है। वर्ष 2014-15 में एमएसएमई को दिया गया बकाया ऋण करीब 10 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट के माध्यम से भी सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को बड़े स्तर पर ऋण गारंटी उपलब्ध कराई गई है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत वर्ष 2014-15 से अब तक करीब 8.34 लाख सूक्ष्म उद्यमों को 24,903 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई है। इससे अनुमानित रूप से 75 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
सरकारी खरीद में एमएसएमई की बढ़ी भागीदारी
केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से सालाना कम से कम 25 प्रतिशत खरीद का प्रावधान है। इसमें महिला उद्यमियों के लिए 3 प्रतिशत और एससी/एसटी उद्यमियों के लिए 4 प्रतिशत खरीद का प्रावधान शामिल है।
एमएसएमई से सार्वजनिक खरीद का मूल्य वर्ष 2020-21 में 40,717 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,15,801 करोड़ रुपये हो गया। इसमें एससी/एसटी उद्यमियों से 3,984 करोड़ रुपये और महिला उद्यमियों से 9,059 करोड़ रुपये की खरीद शामिल है।
समय पर भुगतान के लिए TReDS
एमएसएमई की सबसे बड़ी चुनौतियों में समय पर भुगतान की समस्या को दूर करने के लिए TReDS प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एमएसएमई को करीब 8.71 लाख करोड़ रुपये के चालान डिस्काउंटिंग के जरिए भुगतान उपलब्ध कराया गया।
TReDS से जुड़े एमएसएमई की संख्या अप्रैल 2022 में 34,430 से बढ़कर मार्च 2026 तक 2.55 लाख से अधिक हो गई। चालान डिस्काउंटिंग का मूल्य भी वर्ष 2021-22 के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
विवादों के त्वरित समाधान पर जोर
देशभर में विलंबित भुगतान और संबंधित विवादों के निपटारे के लिए 161 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदें (MSEFCs) स्थापित की गई हैं। संशोधन के तहत राज्यों को परिषदों की संरचना को आवश्यकतानुसार व्यवस्थित करने और अतिरिक्त परिषदों के गठन की सुविधा दी गई है। ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) को भी मजबूत किया गया है, जिससे विवादों का कम समय और कम लागत में समाधान हो सकेगा।
महिला और SC/ST उद्यमियों को बढ़ावा
उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई में 39 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के स्वामित्व वाले हैं। करीब 3.38 करोड़ एमएसएमई महिला उद्यमियों के स्वामित्व में हैं। क्रेडिट गारंटी योजना में महिलाओं के लिए 90 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज और वार्षिक गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है।
वहीं, उद्यम पोर्टल पर 1.24 करोड़ से अधिक एमएसएमई एससी/एसटी उद्यमियों के स्वामित्व में हैं। राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के माध्यम से इन उद्यमियों की क्षमता बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।
संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान
एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, 2026 में मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म को वैधानिक आधार देने, टर्नओवर और निवेश के आधार पर एमएसएमई वर्गीकरण को मान्यता देने तथा एमएसएमई की भुगतान संबंधी समस्याओं को दूर करने के प्रावधान किए गए हैं।
इसके तहत केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एमएसएमई से की गई खरीद के चालानों का TReDS के माध्यम से निपटारा अनिवार्य किया गया है। राज्यों को भी अपने सार्वजनिक उपक्रमों के लिए इसी तरह के प्रावधान अपनाने का अधिकार दिया गया है। विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने, मध्यस्थता या पंचाट से हुए समझौतों की वसूली को भूमि राजस्व के बकाये के रूप में करने तथा कुछ उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर पहली गलती पर चेतावनी सहित क्रमिक दंड का प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से एमएसएमई क्षेत्र में औपचारिकता बढ़ेगी, कारोबार के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा और उद्यमों को देश की आर्थिक वृद्धि के मजबूत आधार के रूप में विकसित होने का अवसर मिलेगा। ये कदम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप अधिक समावेशी, टिकाऊ और रोजगारपरक अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण साबित होंगे।


