‘जशक्राफ्ट’ से बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के जरिए बढ़ेगी कारीगरों की आय, महिलाओं को मिलेगा रोजगार
रायपुर, 12 जुलाई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में विशेष पहल शुरू की गई है।
जशपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस शिल्प से जुड़े करीब 150 परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रशिक्षण के पहले बैच में 46 महिलाएं आधुनिक बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को बुलाया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा और पलंग सहित कई आधुनिक एवं उपयोगी बांस उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।
जशपुर और मनोरा विकासखंड में करीब 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी शामिल हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज और मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़ने के साथ समय-समय पर कौशल उन्नयन और उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत तैयार उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों और देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन और विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ स्थायी बाजार भी उपलब्ध होगा।
राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने, स्थानीय रोजगार सृजन और जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य अगले वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल करना है।



