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4 लाख रुपए के अनुदान से किसान तिहारूराम का ट्रैक्टर खरीदने का सपना हुआ पूरा

कृषि यंत्रीकरण योजना से आधुनिक खेती की ओर बढ़े कदम, सुशासन शिविर में मिली ट्रैक्टर की चाबी

रायपुर, 12 जुलाई। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका ताजा उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम गधाभाटा के प्रगतिशील किसान तिहारूराम चंद्रा हैं, जिनका वर्षों पुराना ट्रैक्टर खरीदने का सपना अब साकार हो गया है।

ग्राम झुमका में आयोजित सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने तिहारूराम को नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। करीब 9.40 लाख रुपए की लागत वाले ट्रैक्टर पर राज्य शासन की ओर से 4 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया गया, जिससे किसान को बड़ी आर्थिक राहत मिली।

तिहारूराम ने बताया कि सीमित भूमि और संसाधनों के कारण पहले खेती के लिए किराए का ट्रैक्टर लेना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी। अब अपना ट्रैक्टर मिलने से खेती समय पर होगी, लागत घटेगी और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वन स्टॉप सेंटर से मिला योजनाओं का लाभ

सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में कृषि विभाग ने ‘वन स्टॉप सेंटर’ स्थापित कर किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया। शिविर के दौरान विभाग को 575 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 545 मांग और 30 शिकायत से संबंधित थे। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 572 आवेदनों का निराकरण कर सुशासन की प्रभावी मिसाल प्रस्तुत की।

उन्नत खेती के लिए किसानों को किया गया प्रोत्साहित

शिविर में किसानों को ट्रैक्टर के साथ-साथ नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज तथा विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का भी वितरण किया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने चौपाल के माध्यम से किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, एग्री स्टैक पंजीयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती मिशन, परंपरागत कृषि विकास योजना तथा दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम जैसी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

कृषि विभाग के इस अभियान ने न केवल किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। जिले में यह अभियान सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।

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