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स्तनपान प्रबंधन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, 100 नर्सिंग कर्मी हुए प्रशिक्षित

वैज्ञानिक जानकारी और प्रभावी परामर्श से मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

भिलाई, 11 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएनएचआरसी), भिलाई ने स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के सहयोग से राज्य स्तरीय ‘स्तनपान एवं लैक्टेशन प्रबंधन कार्यशाला’ का आयोजन किया। कार्यशाला में करीब 100 नर्सिंग विद्यार्थियों और नर्सिंग कर्मियों को स्तनपान के वैज्ञानिक पहलुओं, व्यावहारिक प्रबंधन तथा माताओं को प्रभावी परामर्श एवं सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय कुमार ने कहा कि लैक्टेशन प्रबंधन पर केंद्रित प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ती है और माताओं को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। उचित परामर्श से स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के साथ दस्त, निमोनिया और कुपोषण जैसी स्थितियों से होने वाली शिशु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायता मिल सकती है।

जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान पर जोर

कार्यशाला में बताया गया कि यह पहल भारत सरकार के मातृ स्नेह की पूर्णता (MAA) कार्यक्रम और पोषण अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप है। इनके तहत जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने तथा शिशु को जीवन के पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने को प्रोत्साहित किया जाता है।

तकनीकी सत्रों का संचालन मुख्य सलाहकार (शिशु एवं बाल रोग) डॉ. माला चौधरी ने किया। उन्होंने बेबी-फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव (BFHI) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अस्पतालों में स्तनपान को बढ़ावा देने, संरक्षण और माताओं को प्रभावी सहयोग एवं परामर्श उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। जेएलएनएचआरसी, भिलाई को BFHI के तहत प्रमाणन भी प्राप्त है।

व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ाई दक्षता

स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार (शिशु रोग) डॉ. अरविंद पी. सावंत और अधीक्षक डॉ. संजय गोयल ने प्रतिभागियों को शिशु को सही तरीके से स्तन से लगाने की तकनीक, स्तनपान से जुड़ी सामान्य समस्याओं के प्रबंधन और नई माताओं को प्रभावी परामर्श देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ संवादात्मक केस डिस्कशन, पोस्टर प्रतियोगिता और क्विज भी आयोजित किए गए। प्रशिक्षण का उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों और कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में बदलना रहा।

छत्तीसगढ़ में स्तनपान के आंकड़ों पर चिंता

विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में करीब 49 प्रतिशत नवजातों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया जाता है, जबकि केवल 25 प्रतिशत शिशुओं को छह माह तक विशेष स्तनपान मिल पाता है। इन आंकड़ों को देखते हुए नर्सिंग कर्मियों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि प्रसव के बाद प्रत्येक मां और नवजात को स्तनपान के लिए समय पर उचित सहयोग, मार्गदर्शन और परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने वाली ऐसी पहल मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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