
— श्री पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री
नई दिल्ली। सरकारी खरीद के क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) आज देश के डिजिटल सार्वजनिक खरीद तंत्र का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। यह प्लेटफॉर्म 1.37 लाख सरकारी खरीदारों को करीब 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अपने लेख में कहा है कि जेम ने सरकारी खरीद की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर खरीद व्यवस्था में बुनियादी बदलाव किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत@2047 के विजन को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरा है।
पारदर्शिता से बढ़ा भरोसा
2016 में शुरू हुए जेम ने उत्पाद खोजने और बोली लगाने से लेकर अनुबंध देने तथा भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ी है तथा मनमाने फैसलों की संभावनाएं कम हुई हैं।
सरल पंजीकरण, एकल डिजिटल विंडो, मानकीकृत प्रक्रियाओं और नीतिगत सुधारों ने सरकारी खरीद में भागीदारी की बाधाओं को कम किया है। इससे छोटे कारोबारियों और नए उद्यमियों के लिए सरकारी खरीद बाजार तक पहुंच आसान हुई है।
एमएसएमई और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
जेम ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप घरेलू निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को सरकारी खरीद में अवसर उपलब्ध कराया है। प्लेटफॉर्म पर मात्रा के आधार पर लगभग 60 प्रतिशत ऑर्डर और सकल माल मूल्य (GMV) में 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) की है।
अब तक 12 लाख से अधिक एमएसई ने जेम के माध्यम से 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ऑर्डर पूरे किए हैं। वहीं 2.20 लाख से अधिक महिला उद्यमियों ने 99,713 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर हासिल किए हैं। 42 हजार से अधिक स्टार्टअप्स ने भी 65,600 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ऑर्डर पूरे किए हैं।
वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ी
जेम ने सरकारी खरीद को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 69 हजार से अधिक एससी/एसटी उद्यमियों को सरकारी खरीद में भागीदारी का अवसर मिला है और उन्होंने 23,145 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर पूरे किए हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि जेम केवल खरीद-बिक्री का डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि छोटे कारोबार, महिला उद्यमिता, स्टार्टअप और वंचित वर्गों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
20 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा कुल GMV
पिछले दो वित्त वर्षों में जेम का वार्षिक GMV 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। प्लेटफॉर्म का कुल GMV करीब 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। वर्तमान में जेम पर 10,644 उत्पाद श्रेणियां और 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।
तकनीक, डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन के इस्तेमाल से जेम ने सरकारी खरीद में गति, दक्षता और प्रतिस्पर्धी कीमतों को बढ़ावा दिया है।
सरकारी खरीद में बचत का माध्यम
आईआईटी दिल्ली के जुलाई-अगस्त 2026 के अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच जेम के माध्यम से खरीद से 86,571.69 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हुआ। इसमें कीमत और प्रक्रिया की दक्षता से हुई बचत शामिल है।
अध्ययन में जेम पर उपलब्ध 101 उत्पादों की तुलना अन्य प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध समान उत्पादों से की गई। इसमें पाया गया कि 74.3 प्रतिशत वस्तुओं के मामले में जेम की कीमतें कम थीं और कुल मिलाकर करीब 13.6 प्रतिशत की बचत दर्ज की गई।
विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
जेम के माध्यम से दवाइयों और टीकों से लेकर रक्षा सामग्री, ड्रोन, उपकरण और अवसंरचना से जुड़ी वस्तुओं की खरीद अधिक पारदर्शी एवं कुशल तरीके से की जा रही है। इसका सीधा लाभ सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के रूप में नागरिकों तक पहुंचता है।
जेम अब अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। भविष्य में इसे स्मार्ट, हरित और विश्वस्तरीय डिजिटल खरीद प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने पर जोर है। इसमें नई तकनीकों के साथ स्टार्टअप, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, युवाओं तथा छोटे शहरों और वंचित वर्गों के उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है।
जेम की यात्रा यह दर्शाती है कि डिजिटल तकनीक और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकारी खरीद को अधिक कुशल, समावेशी और जवाबदेह बनाया जा सकता है। इससे उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ करदाताओं के धन का बेहतर और प्रतिस्पर्धी उपयोग सुनिश्चित करने में भी मदद मिल रही है।



