
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत तेजी से आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य देश में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का निर्माण बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता, सुलभ और संकट के समय मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते लोगों का जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च पहले के करीब 65% से घटकर 43% रह गया है।
नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जांच सुविधाओं और मेडिकल कॉलेजों का विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत प्रयोगशालाओं, गंभीर मरीजों के इलाज, रोग निगरानी और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाई जा रही है।
50 से अधिक आधुनिक मेडिकल उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, भारत पहले कई आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर था। इससे इलाज महंगा होने के साथ आपूर्ति व्यवस्था पर भी बाहरी निर्भरता बनी रहती थी। इसी चुनौती को दूर करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति-2023 के तहत देश में मेडिकल डिवाइस निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शुरू की हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत 50 से अधिक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है।
एआई और रोबोटिक्स से बदल रहा चिकित्सा क्षेत्र
भारत की दवा उद्योग, इंजीनियरिंग क्षमता, डिजिटल ढांचा, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कुशल मानव संसाधन आधुनिक चिकित्सा तकनीक के विकास का आधार बन रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट से जुड़े चिकित्सा उपकरण, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थ और दूरस्थ जांच जैसी तकनीकों के जरिए मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
देश में ही चिकित्सा उपकरणों के निर्माण से आयात पर निर्भरता कम होने, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने और इलाज की लागत घटने की उम्मीद है।
15-16 अरब डॉलर का है मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार
भारत का चिकित्सा तकनीक क्षेत्र एशिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार और दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। वर्तमान में इसका आकार करीब 15 से 16 अरब डॉलर बताया गया है और यह लगभग 12% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। इससे यह देश के तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्रों में शामिल हो गया है।
नड्डा ने कहा कि सरकार का फोकस चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, नियामक व्यवस्था, मान्यता प्राप्त परीक्षण सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर है। इससे मरीजों की सुरक्षा के साथ वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बढ़ेगी।
मरीजों तक तेजी से पहुंचेगा शोध का लाभ
उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, स्टार्टअप और निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को तेजी से उत्पादन और फिर मरीजों तक पहुंचाने से ही इसका वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में मजबूत चिकित्सा उपकरण उद्योग की अहम भूमिका होगी। इससे उच्च मूल्य वाले उत्पादन, रोजगार, निर्यात और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कैंसर, हृदय रोग, गैर-संचारी रोग, आपातकालीन चिकित्सा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं जैसी प्राथमिकताओं को भी मजबूती मिलेगी।
नड्डा ने कहा कि आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक का लक्ष्य केवल देश में उपकरण बनाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है।



