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चोरी का खुलासा या श्रेय की लड़ाई ? या कहानी कुछ और दुर्ग पुलिस पर उठे सवाल

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दुर्ग धमधा – जिले में दोपहिया वाहन चोरी गिरोह के खुलासे के साथ अब एक नया विवाद भी सामने आ गया है। पुलिस की सफलता की कहानी के बीच ही कार्रवाई के श्रेय और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

थाना सुपेला पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि सार्वजनिक स्थानों से बाइक चोरी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई में 4 आरोपियों और एक विधि से संघर्षरत बालक को पकड़ा गया है।

आरोपियों की निशानदेही पर 5 स्प्लेंडर मोटरसाइकिल और 1 एक्टिवा सहित कुल 6 वाहन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार ये चोरी की घटनाएं नेहरू नगर अटल प्रतिमा, लक्ष्मी नगर सुपेला और भिलाई नगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र से जुड़ी हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में हर्ष साहू, गजानंद यादव, देवेन्द्र यादव और अजय पटेल के नाम शामिल हैं।

लेकिन इस पूरे मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब सूत्रों ने दावा किया कि असल कार्रवाई सुपेला नहीं बल्कि धमधा पुलिस ने की थी। जानकारी के अनुसार, संदिग्धों को पहले धमधा थाना क्षेत्र में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और वहीं से चोरी के वाहनों की बरामदगी भी हुई। इसके बाद पूरा मामला सुपेला थाना को सौंप दिया गया।

सूत्रों का यह भी कहना है कि बरामद सभी गाड़ियों को पहले धमधा थाना में रखा गया और बाद में एक छोटे मालवाहक वाहन से सुपेला थाना भेजा गया।

ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि कार्रवाई का वास्तविक श्रेय किसे मिलना चाहिए।
मामले को और गंभीर बनाते हुए यह आरोप भी सामने आया है कि एक आरोपी को कथित लेन-देन के बाद छोड़ दिया गया। इस आरोप में धमधा थाना के एक सब-इंस्पेक्टर और एसडीओपी कार्यालय से जुड़े वाहन चालक का नाम चर्चा में है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब जिले के एसएसपी विजय अग्रवाल सख्त पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं। अब देखना होगा कि क्या इन आरोपों पर सख्त कार्रवाई होती है या मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाता है।

वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्र ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

एक तरफ पुलिस संगठित अपराध पर बड़ी सफलता का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ उसी कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह असली सफलता है या फिर श्रेय की जंग में सच कहीं दब गया है।

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