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छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेजबलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी, व्यावसायिक खनन की दिशा में बढ़ा अहम कदम

रायपुर, 27 जून। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण के तहत बड़े व्यास (लार्ज डायमीटर) की ड्रिलिंग शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय को क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित निदेशक मंडल की बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक खनन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल, भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जिसमें 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हुई है।

बैठक में बैलाडीला डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 सहित राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से 70 लाख टन प्रतिवर्ष तक बढ़ाने की योजना है। वहीं डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है।

बैठक में सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

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