नारायणपुर से शुरू हुई बस्तर तिरंगा यात्रा, पहले दिन दंतेवाड़ा पहुंची

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने किया नेतृत्व, शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कवर्धा। बस्तर में शांति, एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा-2026’ बुधवार को नारायणपुर से शुरू हुई। हाईस्कूल मैदान से उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने बाइक पर तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया। समाज प्रमुखों ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया।

यात्रा के दौरान मंत्री ने शहीद स्थलों पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद स्थल की मिट्टी एकत्र की और शहीदों की स्मृति में पौधरोपण किया। साथ ही शहीद परिवारों से मुलाकात कर उनका सम्मान किया।
‘शहीदों के बलिदान से लिखी जा रही विकास की नई कहानी’
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में शांति और विकास की जो नई कथा लिखी जा रही है, उसकी नींव शहीदों के बलिदान से बनी है। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश लेकर बस्तर आए हैं। अब नक्सलवाद के कारण वर्षों तक विकास से दूर रहे अंदरूनी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और सुरक्षित वातावरण में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास यहां के संसाधनों, लघु वनोपज और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप किया जाएगा। सरकार इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।

‘अब दुनिया बस्तर को जानेगी’
वन मंत्री एवं नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने कहा कि जिन क्षेत्रों को कभी नक्सल गतिविधियों का केंद्र माना जाता था, आज उन्हीं रास्तों से तिरंगा यात्रा निकल रही है। यह शांति और समृद्धि की यात्रा है। अब समय आ गया है कि दुनिया बस्तर को जाने और बस्तर के लोग दुनिया में अपनी पहचान बनाएं।
यात्रा के दौरान दोनों मंत्रियों ने ग्रामीणों से संवाद कर विकास को लेकर उनके सुझाव जाने। महिला स्व-सहायता समूहों से मुलाकात कर स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और मार्केटिंग की योजनाओं की जानकारी ली। अधिकारियों को ग्रामीणों को संसाधनों की कमी नहीं होने देने के निर्देश दिए।

नारायणपुर से दंतेवाड़ा तक पहुंची यात्रा
पहले दिन यात्रा नारायणपुर से मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई, कन्हारगांव, कड़ेनार, बोदली, सातधार और बारसुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
दूसरे दिन यात्रा दंतेवाड़ा से सुकमा और बीजापुर के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। तीसरे दिन बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर यात्रा का समापन होगा।


