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सरकारी योजना और वैज्ञानिक खेती से बदली कमार किसान की किस्मत


4 एकड़ में खीरे की खेती से बढ़ी आय, दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

रायपुर, 30 जून। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सेलबहरा निवासी विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के किसान खीमांशु गजेसिंग ने वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं के सहयोग से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ में व्यावसायिक खीरे की खेती कर बेहतर उत्पादन और आय हासिल की है।

किसान के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले पारंपरिक खेती के कारण उन्हें लागत निकालना भी मुश्किल होता था, लेकिन विभागीय अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन के बाद उन्होंने उन्नत बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई, पौध संरक्षण और मचान पद्धति जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

खीरे की फसल बुवाई के 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। मचान पद्धति से फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनकी गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। किसान की उपज की स्थानीय बाजारों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।

खीमांशु गजेसिंग का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग और सरकारी योजनाओं ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का अवसर दिया। अब वे अन्य उद्यानिकी फसलों का भी विस्तार कर उत्पादन और आय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग का कहना है कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। खीमांशु गजेसिंग की सफलता इसी दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है।

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