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0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों के व्यापक सर्वेक्षण हेतु विभागों को दिए गए दिशा-निर्देश

AP VISHWARAJ TAMRAKAR district buro chief KCG

खैरागढ़ : कलेक्टर एवं पदेन जिला मिशन समन्वयक इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला स्तर पर बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, समग्र शिक्षा के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के विकासखंड स्तरीय अधिकारी एवं बीआरपी समावेशी शिक्षा उपस्थित रहे।

बैठक में कलेक्टर ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के व्यापक सर्वेक्षण को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण का उद्देश्य जिले के प्रत्येक दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की पहचान कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास एवं शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मेडिकल आकलन, दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने, मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा यूडीआईडी (यूनीक डिसेबिलिटी आईडी) पंजीयन में सहयोग करने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, दिव्यांगता की श्रेणी एवं गंभीरता के सत्यापन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता एवं शिविर आयोजन तथा बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के चिन्हांकन के लिए आवश्यकतानुसार मनोवैज्ञानिकों की व्यवस्था में सहयोग करने को कहा।

समाज कल्याण विभाग को दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति एवं पुनर्वास योजनाओं सहित विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा करने, सर्वेक्षण में चिन्हित बच्चों को योजनाओं से जोड़ने, दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने तथा आवश्यकतानुसार पुनर्वास सेवाओं एवं संस्थाओं से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।

महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पहचान कर प्रारंभिक सूची उपलब्ध कराने, कुपोषित एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जानकारी साझा करने, गृह भ्रमण एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों में सहयोग करने तथा प्रारंभिक हस्तक्षेप (अर्ली इंटरवेंशन) से संबंधित गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को फील्ड स्तर पर संयुक्त रूप से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिनों की टीम आपसी समन्वय के साथ सर्वेक्षण कार्य को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करें, ताकि जिले के कोई भी विशेष आवश्यकता वाले बच्चे शासन की सुविधाओं एवं अधिकारों से वंचित न रहें।

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