₹81.19 लाख धान घोटाले में एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं, आखिर अपराधियों को सत्ता का संरक्षण किसका? – सुनील केशरवानी

कवर्धा। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिलाध्यक्ष सुनील केशरवानी ने सहसपुर लोहारा, बासिनझोरी एवं बिरनपुर कला धान खरीदी केंद्रों में सामने आए ₹81.19 लाख के धान घोटाले को प्रदेश की भ्रष्ट व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बताया है।
उन्होंने कहा कि जब विभागीय जांच, भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से गबन सामने आ चुका है तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 318(4) एवं 3(5) के तहत एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, तब आखिर अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
सुनील केशरवानी ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस छोटे-छोटे चोरी के मामलों में तत्काल कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज सकती है, तो करोड़ों की सरकारी व्यवस्था से जुड़े इस गंभीर आर्थिक अपराध में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या पुलिस केवल जांच का बहाना बनाकर आरोपियों को संरक्षण दे रही है?
उन्होंने कहा कि यदि विभाग स्वयं जांच कर गबन की पुष्टि कर चुका है और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट भी उपलब्ध है, तो फिर गिरफ्तारी में किस बात की बाधा है? क्या इस पूरे मामले में प्रभावशाली नेताओं या सत्ता से जुड़े लोगों का संरक्षण प्राप्त है? यदि जांच में किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसका नाम भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
केशरवानी ने तंज कसते हुए कहा कि जब किसी छोटे विरोध प्रदर्शन या मामूली नुकसान के मामले में लोगों को हथकड़ी पहनाकर जुलूस निकालते हुए कोर्ट ले जाया जाता है, तो क्या लाखों रुपये के सरकारी धन का गबन करने वालों के साथ भी कानून का वही व्यवहार होगा, या उनके लिए अलग नियम बनाए गए हैं?
उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि इस मामले में सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जाए तथा यदि किसी भी राजनीतिक संरक्षण की भूमिका सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में लाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।


