स्वच्छता केवल शासन की योजना नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामवासी की जिम्मेदारी है – कलेक्टर गोपाल वर्मा

कवर्धा, 25 जून 2026। कलेक्टर गोपाल वर्मा के निर्देशन में जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित 60 ग्राम पंचायतों में चार प्रकार के डिब्बों के माध्यम से घर-घर से अलग-अलग श्रेणी का कचरा संग्रहित किया जा रहा है। यह कार्य महिला स्वच्छग्रही दीदियों द्वारा किया जा रहा है, जो प्रत्येक घर तक पहुंचकर सूखा, गीला, सैनिटरी एवं विशेष कचरे का पृथक संग्रह कर रही हैं।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि स्वच्छता केवल शासन की योजना नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामवासी की जिम्मेदारी है। जनभागीदारी से ही स्वच्छ और स्वस्थ गांवों का निर्माण संभव है।
अभियान के तहत कोटवारों द्वारा प्रतिदिन मुनादी कर ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे कचरा खुले में न फेंकें, न जलाएं तथा उसे महिला स्वच्छग्रही दीदियों को ही सौंपें। जिला एवं जनपद स्तर के अधिकारी भी गांवों का लगातार भ्रमण कर लोगों को कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक के कम उपयोग तथा उसके सुरक्षित निपटान के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
महिला स्वच्छग्रही घर-घर से एकत्रित कचरे को अलग-अलग कर सुरक्षित सेग्रिगेशन शेड में रख रही हैं। साथ ही ग्रामीणों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर कपड़े के थैले अपनाने तथा प्लास्टिक के पुनर्चक्रण के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
कलेक्टर के निर्देशानुसार चयनित ग्राम पंचायतों में नारा लेखन, चित्रकला, चौपाल, स्कूली बच्चों की स्वच्छता रैली, घर-घर संपर्क और वार्ड स्तरीय बैठकों के माध्यम से निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
471 ग्राम पंचायतों में विशेष स्वच्छता एवं प्लास्टिक मुक्ति अभियान
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले की 471 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को प्लास्टिक का कम उपयोग करने, कपड़े के थैले अपनाने, प्लास्टिक का वैज्ञानिक निपटान करने, कचरा न जलाने तथा महिला स्वच्छग्रही दीदियों को कचरा सौंपने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत गांगपुर, कुम्हारदनिया, कोहड़िया, बिरेंद्रनगर, धर्मगढ़, भाठकुंडेरा और राजपुर सहित विभिन्न पंचायतों में सरपंच, सचिव, पंच एवं ग्रामीणों की सहभागिता से स्वच्छता शपथ एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अभियान के दौरान ग्रामीणों को चार रंगों के कचरा डिब्बों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है—
- हरा डिब्बा – गीला कचरा (सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन आदि)
- नीला डिब्बा – सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु आदि)
- लाल डिब्बा – सैनिटरी कचरा (मास्क, बैंडेज, सैनिटरी सामग्री आदि)
- काला डिब्बा – विशेष कचरा (ई-वेस्ट, मेडिकल वेस्ट, बल्ब आदि)
जिला प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों में व्यवहार परिवर्तन लाकर स्वच्छ, स्वस्थ और प्लास्टिक मुक्त गांवों का निर्माण करना है, ताकि जनसहभागिता से स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।

