G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
DelhiINDIAखास-खबर

स्टील फ्रेम का पुनर्निर्माण: शासन से सेवा तक सुधारों का सिलसिला

नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक और समयबद्ध सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य औपनिवेशिक दौर से विरासत में मिले उस प्रशासनिक ढांचे को बदलना है, जो कभी शासन करने के लिए बनाया गया था। अब इसे नागरिकों की सेवा, जवाबदेही और पारदर्शिता पर केंद्रित किया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, वर्ष 2014 में केंद्र सरकार के पास नागरिक शिकायतों के निपटारे में औसतन 157 दिन लगते थे। अब यह समय घटकर करीब 15 दिन रह गया है। शिकायतों के वार्षिक निपटारे की संख्या भी करीब 3 लाख से बढ़कर 27 लाख हो गई है। शिकायतों के निवारण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की संख्या बढ़कर करीब एक लाख हो गई है।

डिजिटल तकनीक से शिकायत निवारण में तेजी

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। यह प्रणाली अब 22 भाषाओं में उपलब्ध है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिकायतों को संबंधित विभाग और अधिकारी तक पहुंचाने में मदद करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रत्येक माह की 20 तारीख को CSC-CPGRAMS दिवस के रूप में निर्धारित किया गया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुधार केवल डिजिटल तकनीक तक सीमित नहीं हैं। असली बदलाव अधिकारियों की कार्यसंस्कृति में किया जा रहा है।

नियम आधारित व्यवस्था से भूमिका आधारित व्यवस्था

वर्ष 2020 में मिशन कर्मयोगी की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। इसके तहत iGOT कर्मयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1.65 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर हिंदी सहित 18 भारतीय भाषाओं में 5,000 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

प्रशिक्षण और निरंतर सीखने को अब अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन तथा पदोन्नति से भी जोड़ा गया है। इससे सरकारी सेवा में जवाबदेही और क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया गया है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता

सरकारी भर्ती में औपनिवेशिक दौर की कई प्रक्रियाओं को समाप्त किया गया है। वर्ष 2016 के बाद केंद्र सरकार के कार्यालयों में ग्रुप-सी और अराजपत्रित ग्रुप-बी के कई पदों पर साक्षात्कार समाप्त किए गए। 24 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों ने भी इस व्यवस्था को अपनाया है।

सरकारी दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन कराने की पुरानी व्यवस्था को भी समाप्त किया गया। सफल उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन पूरा होने तक अस्थायी रूप से नौकरी में शामिल होने की सुविधा दी गई है। सरकार ने 1,600 से अधिक अप्रचलित कानूनों को भी समाप्त किया है।

प्रशासन में ‘कर्तव्य’ की भावना

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रालय को नॉर्थ ब्लॉक से कर्तव्य भवन में स्थानांतरित किया जाना केवल भवन बदलने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह प्रशासनिक सोच में बदलाव का प्रतीक है। शासन का उद्देश्य नियंत्रण नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा और उनके प्रति जवाबदेही होना चाहिए।

महिला कर्मचारियों के लिए सुविधाओं का विस्तार

सरकारी सेवा में महिलाओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। संतान खोने वाली महिला कर्मचारियों को 60 दिन का विशेष मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान किया गया है। सरोगेसी के माध्यम से परिवार का विस्तार करने वाली माताओं को भी संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव की सुविधा दी गई है। एकल माताओं के लिए एक कैलेंडर वर्ष में इसके अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला को जांच पूरी होने तक 90 दिन का अवकाश देने की व्यवस्था भी की गई है। दिव्यांग महिला अधिकारियों और दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए भी अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किया गया है।

रोजगार और पेंशन सेवाओं में सुधार

पिछले कुछ वर्षों में रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। मसूरी में कॉमन फाउंडेशन कोर्स के जरिए विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को साथ प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अलग-अलग विभागों के बजाय एक समन्वित सरकार के रूप में काम कर सकें।

पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा शुरू होने से उन्हें बैंक या कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है। वहीं, यूपीएससी की प्रक्रिया में एक बार पंजीकरण जैसी सुविधाओं से अभ्यर्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया आसान हुई है।

डॉ. सिंह के अनुसार, सरकारी सेवा में ओबीसी प्रतिनिधित्व वर्ष 2014 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से विरासत में मिले ‘स्टील फ्रेम’ को रातोंरात बदला नहीं जा सकता था। पिछले 12 वर्षों में विभिन्न सेवाओं, नियमों और प्रक्रियाओं में लगातार सुधार करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को संविधान की उस भावना के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें सरकार का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना और उसके प्रति जवाबदेह रहना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page