छत्तीसगढ़ी गीत गरमी के मारे कविराज चंद्रभूषण यदु (रामपुर ) के गोठ

AP न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो चीफ KCG
छत्तीसगढ़ी गीत गरमी के मारे कविराज चंद्रभूषण यदु (रामपुर / साळहेवारा ) के गोठ
तर तर चुहत हे पसीना जी गरमी के मारे
तरी ऊपर पूरा शरीर भर होगे तर बतर जी
पसीना के मारे —-
आगी अंगरा ऊगलत सुरुज उगथे
झोला झांझ झकोरा संझा बेरा बुड़थे
अब आगे अऊ नव तपा जेठ महीना जी
गरमी के मारे
तर तर चुहत हे पसीना जी गरमी के मारे
होरा भुजे बरोबर दिन भर भुंजत
तावा कस जरथे पांव धरती खुदत
नींद परे नहीं एसी पंखा कूलर बीना जी
गरमी के मारे
तर तर चुहत हे पसीना जी गरमी के मारे
ठंडी बरसात सबो ला सहि जाथन
गरमी के ताप ला झेल नई पाथन
शासत मा जीव मुश्किल होगे जीना जी
गरमी के मारे
तर तर चुहत हे पसीना जी गरमी के मारे
ताजा हाल गरमी के

