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योजना बंद करने पर सेस खत्म होना प्रक्रिया का भाग है अहसान नहीं, पंजीयन शुल्क और गाइडलाइन दरों में वृद्धि वापस ले सरकार

रायपुर/21 मार्च 2026। अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर उपकर (सेस) समाप्त करने के सरकार के दावे पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जिस उद्देश्य से उपकार लगाया जाता है, केवल उसी मद में ही वह राशि खर्च की जा सकती है, जब इस सरकार ने आते ही छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना को खत्म कर दिया तो उसके वित्त पोषण हेतु स्टांप शुल्क में लगाए गए उपकार को वसूलने का इस सरकार को अधिकार ही नहीं है, विगत 2 वर्षों से लगातार इस मद में वसूली गई राशि आखिर गई कहां यह सरकार को बताना चाहिए। क्या योजना बंद करने के बाद भी उसे मद में वसूले गए सेस की राशि को यह सरकार वापस लौटाएगी? या वह राशि भी भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार ने जमीनों की गाइडलाइन की दरों को बेतहाशा बढ़ाकर औसतन 500 प्रतिशत की वृद्धि की है, इसके कारण से जमीनों के रजिस्ट्री लागत भी महंगी हो गई है। पंजीयन शुल्क जो पहले 0.85 प्रतिशत था, उसमें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जब गाइडलाइन दलों में 30 प्रतिशत की छूट दी थी, तब पंजीयन शुल्क को 4 प्रतिशत किया था, अब जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने गाइडलाइन दरों में दी जाने वाली पूर्ववर्ती सरकार की 30 प्रतिशत की छूट को खत्म कर दिया है, और नई गाइडलाइन दरों में अनाप शनाप वृद्धि कर दिया है, ऐसे में पंजीयन शुल्क की वृद्धि वापस लेकर वापस 0.85 प्रतिशत किया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों से जमीन और मकान खरीदने का सपना छीन रही है। भाजपा के नेता, मंत्री अपनी काली कमाई से खरीदे गए, जमीनों का वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए ही गाइडलाइन दरों में बहता हादसा वृद्धि कर रहे हैं, आमजनता को इससे कोई लाभ नहीं उल्टा आर्थिक बोझ बढ रहा है। सेस या उपकार समाप्त करने का एहसान जताकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने काले कारनामों को छुपा नहीं सकती, असलियत यह है कि मूल योजना बंद करने के बाद उस मद पर सेस वसूलने का सरकार को अधिकार ही नहीं।

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