ChhattisgarhINDIARaipurआरंगखास-खबर

मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा

मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा

रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक 145 से अधिक किमी का सफर: कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की अगुवाई में उमड़ा जनसैलाब

आरंग/रायपुर/बलौदाबाजार/गिरौदपुरी धाम: बोल रहा अब हिंदुस्तान—मनखे मनखे एक समान” के संकल्प के साथ रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन में छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव सायं एवं राजागुरु,धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब की उपस्थिति में शुभारंभ हुई पांच दिवसीय ऐतिहासिक ‘सतनाम सद्भाव पदयात्रा का पावन तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में भव्य समापन हुआ। सतनामी समाज के गुरु एवं छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में निकली इस यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की एक नई मिसाल पेश की।

145 किलोमीटर की यात्रा, 50 से अधिक गांवों में जन-जागरण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजागुरु धर्मगुरु बालदास साहेब के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह यात्रा 145 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर गिरौदपुरी पहुंची। यात्रा के दौरान 50 से अधिक गांवों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बनता था। श्वेत ध्वजों और एक दिन तिरंगे झंडे के साथ निकली इस पदयात्रा ने यह संदेश दिया कि मानवता और राष्ट्रवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। गिरौदपुरी धाम पहुँचते ही हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु घासीदास बाबा जी की पावन गुरु गद्दी पर मत्था टेका और विशाल जैतखाम की वंदना की। इस अवसर पर पूरा परिसर ‘सतनाम’ के जयकारों से गूंज उठा। पंथी नृत्य की थाप, मांदर की गूंज और पारंपरिक अखाड़ा दलों के प्रदर्शन ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी जीवंत बना दिया।

समरसता भोज: जाति-पाति के बंधन टूटे
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता प्रतिदिन आयोजित होने वाला ‘समरसता भोज’ रहा। इसमें विभिन्न समाजों और धर्मों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते थे, जो बाबा जी के ‘बराबरी’ के संदेश को जमीन पर उतारने जैसा था। रात्रि विश्राम के दौरान कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने स्थानीय नागरिकों और सेवादारों का शाल-श्रीफल से सम्मान कर उनके योगदान को सराहा।

पुष्पवर्षा/स्वागत पूरी पदयात्रा के दौरान मार्ग में ग्रामीणों का उत्साह चरम पर था। कई स्थानों पर JCB के माध्यम से पुष्पवर्षा की गई और गुरु खुशवंत साहेब का विशाल गजमाला पहनाकर स्वागत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और बाबा जी के उपदेशों का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया।

नारा नहीं, समाज पुनर्निर्माण का संकल्प है – गुरु खुशवंत साहेब…..समापन समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा: यह यात्रा केवल चलने का नाम नहीं है, बल्कि यह समाज के पुनर्निर्माण का संकल्प है।मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश तब तक अधूरा है, जब तक हम हर व्यक्ति को समान सम्मान नहीं देते। इस पदयात्रा ने सिद्ध कर दिया है कि जब समाज एक लक्ष्य के लिए एकजुट होता है, तो इतिहास रचा जाता है।”

अनुशासन और भक्ति का संगम
यात्रा के दौरान श्वेत वस्त्रों में अनुशासित कतारों में चलते पदयात्री सामाजिक एकता की अद्भुत छवि प्रस्तुत कर रहे थे। प्रशासन और सेवा शिविरों के सहयोग से यह विशाल आयोजन निर्बाध रूप से संपन्न हुआ। गिरौदपुरी की धरती पर देर तक एक ही नारा गूंजता रहा— “बोल रहा है हिंदुस्तान, मनखे-मनखे एक समान!

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page