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अर्बन चैलेंज फंड से छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

एक लाख करोड़ रुपये के फंड का लाभ लेने गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करने पर जोर, नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगरीय निकायों को गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शहर केवल नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, रोजगार, निवेश और नवाचार के प्रमुख आधार भी हैं।

मुख्यमंत्री साय नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (यूआईडब्ल्यूआईएन) की प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड प्रदेश के नगरीय निकायों के लिए विकास का बड़ा अवसर है। इसके माध्यम से शहरों को आधुनिक, सुविधासंपन्न, आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है। निकायों को ऐसी परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए, जो नागरिकों का जीवन आसान बनाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दें।

नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते

कार्यशाला में नगरीय विकास को मजबूत बनाने के लिए दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच तथा दूसरा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुआ।

इन समझौतों के माध्यम से नगरीय निकायों को परियोजनाओं की बेहतर योजना तैयार करने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकसित करने में सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय संस्थानों, विशेषज्ञ संस्थाओं और शासन के बीच मजबूत साझेदारी से शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।

जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या का स्थायी समाधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी विकास की योजनाएं केवल वर्तमान समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले कई दशकों की जरूरतों के अनुसार तैयार की जानी चाहिए। पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी, परिवहन और स्वच्छता की दीर्घकालिक योजना जरूरी है।

उन्होंने बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया। साथ ही शहरों में बिजली और अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों को व्यवस्थित करने तथा जहां संभव हो, उन्हें भूमिगत करने की योजनाएं तैयार करने को कहा।

उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल, बिजली, जल निकासी और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को अलग-अलग देखने के बजाय समग्र शहरी नियोजन के तहत पूरा किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और बार-बार निर्माण कार्यों की जरूरत भी कम होगी।

एक लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड बड़ा अवसर

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। अब नगरीय निकायों को तकनीकी रूप से मजबूत और व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड से अधिकतम संसाधन हासिल करने की दिशा में काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप नगरीय विकास की कार्यशैली में बदलाव जरूरी है। किसी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता से तय होती है। इसलिए परियोजना की शुरुआत से ही इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।

वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनें नगरीय निकाय

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं से शहरों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता की मांग बढ़ रही है। ऐसे में नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। इसके लिए सरकारी सहायता के साथ बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने नगरीय निकायों को देश के अन्य शहरों में अपनाए जा रहे सफल नवाचारों का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की सलाह दी।

विकसित छत्तीसगढ़ के लिए सुनियोजित शहरीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। शहरों को निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाले केंद्रों के रूप में विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने महापौरों, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों तथा अधिकारियों से अपने शहरों की वास्तविक जरूरतों को समझकर दीर्घकालिक विकास योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसी परियोजनाओं पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए, जिनका लाभ वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी मिले।

मुख्यमंत्री ने पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने रेल अधोसंरचना के विकास और नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं को भी प्रदेश में विकास एवं निवेश की नई संभावनाओं से जोड़ा।

विशेषज्ञों से मिला तकनीकी मार्गदर्शन

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं, वित्तीय संसाधन जुटाने, परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आधुनिक शहरी नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौतों से नगरीय निकायों को परियोजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में प्रदेश के 14 नगर निगमों के महापौर, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, तेलंगाना नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव डॉ. टी.के. श्री देवी, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता, विभागीय संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, सुडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभिन्न निकायों के जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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