किसानों की आय बढ़ाने फसल विविधीकरण पर जोर, सरगुजा में लीची-स्ट्रॉबेरी की खेती को मिलेगा बढ़ावा

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने खरीफ की समीक्षा कर रबी सीजन की कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

अंबिकापुर। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए फसल विविधीकरण के साथ कुक्कुटपालन, मछलीपालन, बकरीपालन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने गुरुवार को अंबिकापुर में कृषि एवं संबद्ध विभागों की संभागीय बैठक में अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में खरीफ 2026 के दौरान कृषि गतिविधियों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही रबी वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। परदेशी ने कहा कि खरीफ सीजन में प्रदेशभर में अच्छा काम हुआ है और सरगुजा संभाग के सभी जिलों का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। रबी सीजन में भी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करें। किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
दलहन, तिलहन और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
कृषि उत्पादन आयुक्त ने पारंपरिक फसलों के साथ वैकल्पिक और लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग में दलहन, तिलहन, प्राकृतिक खेती और उद्यानिकी के माध्यम से फसल विविधीकरण की अच्छी संभावनाएं हैं। किसानों को उन्नत एवं प्रमाणित बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
कृषि सचिव ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना की समीक्षा करते हुए किसानों को इसका अधिकतम लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सरसों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास करने को कहा।
लीची, स्ट्रॉबेरी और आलू की खेती पर फोकस
उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान सरगुजा संभाग की जलवायु को उद्यानिकी फसलों के अनुकूल बताते हुए लीची, स्ट्रॉबेरी, ऑयल पाम और आलू का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया गया। धान आधारित फसल प्रणाली में उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं और अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) को लेकर भी चर्चा हुई।
पशुपालन और मछलीपालन योजनाओं की समीक्षा
बैठक में पशुधन विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें एलएसडी एवं पीपीआर टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, गौधाम और गौशाला संचालन, दुग्ध सहकारी समितियों के गठन तथा मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट के कार्य शामिल रहे। पशु चिकित्सकों को नियमित स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए गए।
मत्स्यपालन विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, नेशनल फिशरमेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीयन, अमृत सरोवरों को मछलीपालन से जोड़ने और इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
रबी सीजन के लिए तैयार होगी विशेष कार्ययोजना
बैठक में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रबी में पड़ती भूमि पर अतिरिक्त क्षेत्र में फसल उत्पादन, ग्रीष्मकालीन धान का रकबा शून्य करने, पीएम-आशा के तहत उपार्जन केंद्रों के कैचमेंट क्षेत्र में फसलवार आवक, उर्वरक वितरण प्रणाली (एफएफएस), साथी-2 के माध्यम से बीज वितरण और उर्वरकों के पर्णीय छिड़काव पर चर्चा की गई।
इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
स्थानीय संसाधनों के अनुसार नवाचार अपनाने की सलाह
संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने कहा कि सरगुजा संभाग कृषि उत्पादन के साथ पशुपालन, कुक्कुटपालन, मछलीपालन और उद्यानिकी के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इन गतिविधियों से किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय संसाधनों के अनुरूप नवाचार करने और उपयोगी पारंपरिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी।
बैठक में कृषि संचालक राहुल देव, पशु चिकित्सा सेवाएं संचालक चंद्रकांत वर्मा, उद्यानिकी संचालक लोकेश कुमार, मत्स्य पालन संचालक नारायण सिंह नाग, छत्तीसगढ़ बीज एवं कृषि विकास निगम के संचालक अजय कुमार अग्रवाल, नाबार्ड के महाप्रबंधक डी.के. गवली सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
संभाग के सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और कोरिया जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों की प्रगति का प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ और कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।

