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राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के लिए राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण, वैज्ञानिक सोच और नवाचार पर जोर

रायपुर। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के तहत 33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नई थीम, परियोजना निर्माण, अनुसंधान पद्धति और मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी देना था, ताकि विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम “साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी” रखी गई है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक और नवाचार आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक ‘ई’ एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे.के. राय, वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. ए.के. पाठक, वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी.के. कानूनगो ने वैज्ञानिक अनुसंधान, परियोजना निर्माण और नवाचार आधारित शिक्षा पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और समस्या समाधान की सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है।

तकनीकी सत्र में R5 तकनीक (रिड्यूस, रीयूज, रिकवर, रीडिजाइन और रीसायकल), ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, खाद्य एवं कृषि की स्थिरता तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर स्थानीय स्तर की समस्याओं को आधार बनाकर उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा संरक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को नवाचार आधारित अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। वहीं प्रो. नमिता ब्राह्मे ने नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्ष तकनीकों और विद्यालय स्तर पर वैज्ञानिक परियोजनाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से “एनर्जी एम्बेसडर” बनने का आह्वान किया।

कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों और रिसोर्स शिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। चयनित बाल वैज्ञानिक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी परियोजनाओं का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।

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