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कबीरधाम के 32 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिले 22.05 करोड़ रुपए, लक्ष्य से अधिक हुआ संग्रहण

कवर्धा। कबीरधाम जिले में वर्ष 2026 के तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र में 32 हजार से अधिक संग्राहकों को अब तक 22.05 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक भुगतान किया जा चुका है। इस वर्ष जिले में 40,234 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य का 100.34 प्रतिशत है। बढ़े हुए पारिश्रमिक का लाभ वनांचल क्षेत्रों के हजारों परिवारों को मिला है।

जिला लघु वनोपज सहकारी संघ के अनुसार जिले की 19 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के 24 लॉटों में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा प्रति मानक बोरा 5,500 रुपए की पारिश्रमिक दर तय किए जाने से संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समय पर भुगतान मिलने से वनाश्रित परिवार खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों पर यह राशि खर्च कर रहे हैं।

बढ़ी पारिश्रमिक से बदली परिवार की आर्थिक स्थिति

वनांचल ग्राम लोखन की निवासी नंदनी मरावी ने बताया कि उनका परिवार खेती और तेंदूपत्ता संग्रहण दोनों पर निर्भर है। सात सदस्यीय परिवार के पास तीन एकड़ कृषि भूमि तथा वनाधिकार पट्टे के तहत एक एकड़ अतिरिक्त भूमि है। परिवार को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले तेंदूपत्ता संग्रहण से होने वाली आय सीमित थी, लेकिन अब प्रति मानक बोरा 5,500 रुपए मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इस राशि से खेती के लिए बीज और खाद खरीदी जाती है, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतें भी आसानी से पूरी हो रही हैं। उनके अनुसार तेंदूपत्ता संग्रहण अब केवल मौसमी रोजगार नहीं, बल्कि परिवार की आय और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर और समय पर भुगतान से वनांचल क्षेत्रों के हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिला है। इससे उनकी आजीविका मजबूत होने के साथ वनाधारित अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

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