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पहली बारिश में ढही दो लाख की रिटर्निंग वॉल, ग्रामीणों की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन, जांच दल गठित

पंडरिया। जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत पलानसरी में 15वें वित्त आयोग की लगभग 2 लाख रुपये की लागत से निर्मित रिटर्निंग वॉल पहली ही बारिश में धराशायी हो जाने का मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद जनपद पंचायत पंडरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया है।


मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत पलानसरी में 15वें वित्त आयोग की राशि से रिटर्निंग वॉल का निर्माण कराया गया था। आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद पहली बारिश में ही रिटर्निंग वॉल ढह गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो इतनी जल्दी ढहने की नौबत नहीं आती।
शिकायतकर्ता नारायण प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत (टोकन क्रमांक CC260700077446) के माध्यम से आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है तथा शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि लगभग 2 लाख रुपये की लागत से निर्मित कार्य टिकाऊ साबित नहीं हुआ, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पंडरिया ने 10 जुलाई 2026 को संशोधित आदेश जारी कर जांच दल का गठन किया है। जांच दल में सहायक लेखा कार्यक्रम अधिकारी राजबहादुर सिंह तथा उप अभियंता गगन गिरी गोस्वामी को शामिल किया गया है।
जारी आदेश में जांच अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी पहलुओं एवं संबंधित अभिलेखों की गहन जांच करें। साथ ही आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण कर तथ्यों के आधार पर अपनी स्पष्ट अनुशंसा सहित दो दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें, ताकि निर्धारित समय सीमा में शिकायत का निराकरण किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनपद पंचायत पंडरिया जांच दल निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से जांच की जाती है तो निर्माण कार्य में हुई कथित लापरवाही और अनियमितताओं की वास्तविकता सामने आ जाएगी। लोगों ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा सरकारी राशि की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
अब पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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