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किसी जमाने में लिखा करते थे पत्र,तो लिखने का हुनर था हममें….- संतोष ताम्रकार

किसी जमाने में लिखा करते थे पत्र,
तो लिखने का हुनर था हममें।

कमबख्त जब से मोबाइल आया है हाथों में,
शेरो शायरी भी हो जाते हैं मोबाइल में।

लिखना पढ़ना केवल विद्यार्थी तक ही सीमित रह गया है,
कभी हम भी अपना अरमान लिखते थे कागज कलम से।

तब लोग दूर होते हुए भी दिल के करीब होते थे,
आज मोबाइल में अपनों को अपनों से दूर कराए रखे हैं।

पहले स्नेह भरी बातों से रहता था मन प्रसन्न,
अब सारा दिन मोबाइल में रहता है मन प्रसन्न।

अब शिष्टाचार का जमाना आ गया है,
एक ही कमरे में बैठे चार व्यक्ति शांति बनाए रखते हैं।

उंगलियां चलती रहती है मन में मुस्कुराते हैं,
जिनकी हाथों में मोबाइल है अपने में मस्त रहते हैं।

अब किसी के आगमन में पैर छूना नहीं है सम्मान,
जो अपना मोबाइल को साइड रख दे,
वह है सबसे बड़ा सम्मान….

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