खाद की कालाबाजारी पर सरकार का शिकंजा, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त
खाद की कालाबाजारी पर सरकार का शिकंजा, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त
4,878 दुकानों की जांच, 97 लाइसेंस निलंबित और 11 निरस्त; किसानों को समय पर खाद-बीज देने पर जोर
रायपुर। खरीफ सीजन 2026 में किसानों को खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने और उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कृषि विभाग प्रदेशभर में उर्वरक की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और मूल्य नियंत्रण की लगातार निगरानी कर रहा है। विभाग ने अब तक 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की है।
जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 625 विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं 183 केंद्रों में बिक्री प्रतिबंध लगाया गया, जबकि 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त किया गया है। इसके अलावा 97 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और 11 दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। कार्रवाई के तहत 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं, जबकि 7 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।
डीएपी की सीमित उपलब्धता के बीच व्यवस्था मजबूत
कृषि विभाग के अनुसार देश में डीएपी की उपलब्धता सीमित होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खरीफ 2026 के लिए प्रदेश में 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य रखा गया है।
21 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया, जिसमें से 1 लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है। वर्तमान में समितियों और गोदामों में 58 हजार 54 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।
किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह
कृषि विभाग ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किसानों को डीएपी के साथ एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलेंगे और डीएपी पर निर्भरता कम होगी।
अधिकारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण डीएपी और एनपीके की आपूर्ति प्रभावित हुई है। देश में डीएपी का करीब 70 से 80 प्रतिशत और एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है।
एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों का मूल्य निर्धारण केंद्र सरकार की नीति के अनुसार होता है, लेकिन राज्य में निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी और कृत्रिम अभाव पैदा करने वालों पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
बारिश से प्रभावित किसानों को मिलेगी सहायता
विभाग ने बताया कि अधिक बारिश से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है या किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन और कृषि विभाग निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


