शिक्षा के तपस्वी सी.पी. चंद्रवंशी को मिला राज्यपाल पुरस्कार, क्षेत्र में हर्ष की लहर

कवर्धा। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगपुरकला के प्रभारी प्राचार्य सी.पी. चंद्रवंशी को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट, चहुंमुखी और निस्वार्थ सेवाओं के लिए छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका के कर-कमलों से राज्यपाल पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। उनके सम्मान से पूरे बोड़ला विकासखंड सहित कबीरधाम जिले का मान बढ़ा है।
शाला त्यागी और कमजोर बच्चों के मसीहा
चंद्रवंशी जी ने शिक्षा को केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा का व्रत माना है। उन्होंने सैकड़ों शाला त्यागी, मंदबुद्धि और क्रोधी स्वभाव के बच्चों को अपने मधुर व्यवहार और मार्गदर्शन से सुधार कर एक सभ्य और जिम्मेदार नागरिक बनाया है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए वे प्रतिवर्ष निःशुल्क एक घंटे की विशेष कोचिंग चलाते हैं। प्रार्थना के बाद विषयवस्तु का वाचन, प्रतिदिन एक घंटे लेखन अभ्यास, ग्रुप पद्धति से होशियार बच्चों के सहयोग से कमजोर बच्चों का प्रावीण्य उन्नयन उनकी अनोखी पहल है।
अपने वेतन से बांटते हैं शिक्षा की रोशनी
मानवता की मिसाल पेश करते हुए श्री चंद्रवंशी अपने वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा गरीब व जरूरतमंद बच्चों पर खर्च करते हैं। कापी, पेन, गणवेश, पुस्तकें, फीस में सहायता, नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण कराकर चश्मा और दवाइयां उपलब्ध कराना उनका नियमित कार्य है। कोरोना महामारी के कठिन समय में भी उन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं, मोबाइल से शंका समाधान और स्वयं नोट्स बनवाकर बच्चों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। सुबह 4:30 बजे पालकों को फोन कर पढ़ाई की जानकारी लेना उनकी कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है।
कोचिंग से एमबीबीएस तक, बेटियों को बनाया अफसर
उनकी निःशुल्क कोचिंग का परिणाम आज सामने है। उनके पढ़ाए सैकड़ों छात्र आज बड़े-बड़े पदों पर चयनित हैं। समाज की बालिकाओं को 17 वर्ष पूर्व निःशुल्क कोचिंग देकर आज उन्हें बड़े पदों तक पहुंचाया। छात्र आनंद कुमार आदिले ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2023 में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में 8वां स्थान प्राप्त कर एमबीबीएस में चयनित होकर गुरु का नाम रोशन किया।
एक शिक्षक में छह विषयों का ज्ञान
श्री चंद्रवंशी गणित, भौतिकी, रसायन, अंग्रेजी, संस्कृत और अर्थशास्त्र विषय के गहरे जानकार हैं। यही कारण है कि किसी भी विषय शिक्षक के अवकाश या प्रशिक्षण में जाने पर भी विद्यालय की पढ़ाई कभी प्रभावित नहीं होती। वे ब्लू प्रिंट आधारित तैयारी और उत्तर लिखने की कला में भी बच्चों को पारंगत करते हैं।
खेल से विज्ञान तक – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम
उनके कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया है, छात्रा रीना मिरज ने अंतरराष्ट्रीय टारगेट बॉल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। कई छात्र राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए। छात्रा कुमारी अंजली अनंत का राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में चयन और रिया मरावी का इंस्पायर अवार्ड में संभाग स्तर पर आइडिया प्रदर्शन। स्काउट-गाइड में रोवर-रेंजर के राज्य स्तरीय प्रदर्शन, इको क्लब के द्वारा सरोधा दादर नेचर कैंप और पौधरोपण। वे स्वयं बेसिक स्काउट मास्टर प्रशिक्षित हैं और पुणे के राष्ट्रीय कैंप में शामिल हो चुके हैं तथा 12 वर्षों तक रेडक्रॉस काउंसलर रहे हैं।
विद्यालय को संवारने वाले कुशल शिल्पी
विद्यालय के भौतिक विकास में भी उनका योगदान अतुलनीय है। सरस्वती माता की प्रतिमा की स्थापना, RO जल संयंत्र, 5 पानी के ड्रम, 100 गमले सहित पौधे, सायकल स्टैंड, अहाता निर्माण, छत रिपेयरिंग, 70 ट्रिप मुरम मिट्टी, पौधा सुरक्षा हेतु बांस-बल्ली और जल संरक्षण हेतु सोख्ता गड्ढा निर्माण जैसे कार्य उनके प्रयासों से ही संभव हुए। उन्होंने बच्चों को जगन्नाथ, उज्जैन, बस्तर, कोरबा, चंद्रपुर, भेड़ाघाट, केशकाल, मल्हार, बिलासपुर, डोंगरगढ़, राजिम, रतनपुर तक शैक्षिक एवं भौगोलिक भ्रमण कराया।
संस्कृति और समाज के प्रेरणास्रोत
समय के पाबंद, अत्यंत अनुशासनप्रिय, ईमानदार, कुशल मंच संचालक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री चंद्रवंशी जस ,जेवारा, रामधुनी, भागवत, देवी भागवत, रामायण मंडली और फाग गीत प्रतियोगिताओं में अनेक प्रथम पुरस्कार जीत चुके हैं। कथा-कहानी और कविता के माध्यम से बच्चों में विषय की स्थायी अवधारणा बनाना उनकी विशेषता है।
निश्चित ही ऐसे जन-जन के प्रिय, स्टाफ से मधुर संबंध रखने वाले और अपने आचरण से सभी को प्रेरित करने वाले कुशल नेतृत्वकर्ता को मिला यह राज्यपाल पुरस्कार शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है।


