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पंचायतों में प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पर रोक, महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी

AP न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो चीफ केसीजी

खैरागढ़ : पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजनों अथवा अन्य व्यक्तियों द्वारा कार्य संचालन (Proxy Representation) किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों का उद्देश्य उनके वास्तविक सशक्तिकरण एवं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है, इसलिए किसी भी प्रकार का प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

जारी निर्देशों के अनुसार पंचायत बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी तथा उनके रिश्तेदारों अथवा अन्य व्यक्तियों की बैठक में भागीदारी पर रोक रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन एवं बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी तकनीकों का उपयोग भी किया जा सकेगा।

ग्राम सभा एवं पंचायत बैठकों की कार्यवाही को सभासार पोर्टल, निर्णय ऐप अथवा अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि महिला प्रतिनिधियों के स्वतंत्र निर्णय एवं सहभागिता को सुनिश्चित किया जा सके।

महिला जनप्रतिनिधियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिले में जेंडर सेन्सिटाइजेशन कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका निभाने वाली महिला प्रतिनिधियों की सफलता की कहानियों का सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

पेसा क्षेत्र की पंचायतों में ग्राम सभा से पूर्व महिला सभा आयोजित करना अनिवार्य किया गया है, वहीं सामान्य क्षेत्रों में भी महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने हेतु महिला सभा आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

निर्देशों में जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व से संबंधित शिकायतों के लिए शिकायत पेटी एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

सभी अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की स्वतंत्र, सक्रिय एवं प्रभावी भागीदारी को व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के रूप में लेने कहा गया है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने एवं प्रत्येक माह की 5 तारीख तक नियमित जानकारी भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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