बाघिन और तीन शावकों पर बरसते रहे पत्थर, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

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बिलासपुर/तखतपुर। तखतपुर क्षेत्र के ग्राम बांधा के जोगीपुर जंगल में एक युवक की बाघिन के हमले में मौत के बाद अब इसी क्षेत्र से सामने आए वीडियो ने वन्यजीव सुरक्षा और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों द्वारा भेजे गए वीडियो में बाघिन अपने तीन शावकों के साथ पहाड़ी क्षेत्र में दिखाई दे रही है। दावा है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने बाघिन और उसके शावकों पर पथराव किया।
जानकारी के अनुसार, जोगीपुर जंगल के फॉरेस्ट बीट आरए-98 क्षेत्र में 25 वर्षीय धरम दास घृतलहरे बांस से निकलने वाला करिल काटने और पीहरी लेने जंगल गया था। इसी दौरान बाघिन ने उस पर हमला कर दिया। हमले में उसकी गर्दन पर गंभीर चोट आई और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
एक महीने से बाघिन की मौजूदगी का दावा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन करीब एक महीने से पहाड़ी पर स्थित गुफानुमा क्षेत्र के आसपास घूम रही थी। इसके बावजूद जंगल में लोगों की आवाजाही जारी रही। ग्रामीणों के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग बांस काटने के लिए जंगल पहुंच रहे थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी की जानकारी स्थानीय स्तर पर थी, तो संवेदनशील क्षेत्र में लोगों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
पथराव से बाघिन और शावकों की जान को भी खतरा
शावकों के साथ मौजूद बाघिन पर पथराव की घटना बेहद संवेदनशील है। खतरा महसूस होने पर बाघिन आक्रामक हो सकती है और ऐसी स्थिति में आसपास मौजूद लोगों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वहीं लगातार मानवीय हस्तक्षेप से बाघिन और उसके तीनों शावकों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।
वन विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। क्या विभाग को बाघिन की मौजूदगी की जानकारी थी? क्या संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर वहां ग्रामीणों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी? क्या बाघिन और शावकों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप या नियमित गश्त की व्यवस्था की गई थी? इन सवालों के जवाब अब जरूरी हो गए हैं।
ग्रामीणों ने जंगल में बांस और लकड़ी कटाई के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि लकड़ी कटाई के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
खतरा अभी टला नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि बाघिन अपने तीन शावकों के साथ क्षेत्र में मौजूद हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों का जंगल में प्रवेश करना, बाघिन को घेरना या उस पर पथराव करना किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकता है।
घटना के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अब जरूरत है कि संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर ग्रामीणों की आवाजाही रोकी जाए, लगातार गश्त बढ़ाई जाए और बाघिन व उसके शावकों की सुरक्षित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
एक युवक की मौत के बाद सामने आई इन घटनाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के साथ-साथ जंगल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि वन विभाग इन परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
