एम्स रायपुर में दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार
बहुविषयक चिकित्सा टीम ने किया उपचार, पोषण और नियमित निगरानी से मिली राहत
रायपुर, 12 अगस्त 2026। एम्स रायपुर में अत्यंत दुर्लभ जन्मजात त्वचा रोग इक्थियोसिस हाइस्ट्रीक्स (Ichthyosis Hystrix) से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची के उपचार में उल्लेखनीय सफलता मिली है। विशेषज्ञों की बहुविषयक टीम द्वारा किए गए समन्वित उपचार और लगातार निगरानी के बाद बच्ची की त्वचा की स्थिति में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया है।
बच्ची को शरीर के बड़े हिस्से में मोटी, कांटेदार और साही जैसे उभरे हुए त्वचा-रूप के लक्षणों के साथ एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग में लाया गया था। रोग की दुर्लभता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए विशेषज्ञों ने विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद उसके लिए दीर्घकालिक उपचार एवं निगरानी की योजना तैयार की।
कई विशेषज्ञों ने मिलकर किया उपचार
त्वचा रोग विभाग के नेतृत्व में गठित बहुविषयक टीम में बाल रोग विशेषज्ञ, आनुवंशिकी विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर (MSSO) तथा अन्य संबंधित विशेषज्ञ शामिल रहे। उपचार में उपयुक्त स्थानीय दवाएं, पोषण संबंधी सहायता, नियमित चिकित्सकीय निगरानी और संभावित जटिलताओं का मूल्यांकन शामिल रहा। निदान की पुष्टि और बीमारी की प्रकृति को बेहतर समझने के लिए त्वचा की बायोप्सी तथा आनुवंशिक जांच की भी योजना बनाई गई।
लगातार उपचार और नियमित फॉलोअप के बाद त्वचा पर दिखाई देने वाले घावों की गंभीरता में कमी आई है। इससे बच्ची और उसके परिवार को काफी राहत मिली है। वर्तमान में बच्ची चिकित्सकीय रूप से स्थिर है।
पोषण और सामाजिक सहयोग पर भी जोर
चिकित्सकों के अनुसार बच्ची के उपचार में पोषण की स्थिति भी महत्वपूर्ण चिंता का विषय रही, जिस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल रोग एवं त्वचा रोग विशेषज्ञ लगातार उसकी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। वहीं मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर्स की टीम परिवार को काउंसलिंग, फॉलोअप के समन्वय और दीर्घकालिक पुनर्वास संबंधी आवश्यकताओं में सहायता कर रही है।
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के उपचार में केवल चिकित्सकीय पहलू ही नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार की पोषण, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली, डॉ. नम्रता छाबड़ा सहित बहुविषयक टीम ने इस दुर्लभ मामले के मूल्यांकन और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

