एम्स रायपुर और संबलपुर विश्वविद्यालय के बीच क्रॉनिक किडनी डिजीज पर शोध को लेकर एमओयू

क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान और संयुक्त क्लिनिकल रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर। मध्य भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एम्स रायपुर और संबलपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा में संयुक्त क्लिनिकल रिसर्च को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा क्षमता का विस्तार करना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नए समाधान विकसित करना है।
इस सहयोग का प्रमुख फोकस बिना स्पष्ट कारण होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKDu) और सिकल सेल रोग जैसी क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याओं पर रहेगा। संबलपुर विश्वविद्यालय के उप पंजीयक (अकादमिक) डॉ. ईश्वर बैथारू ने बताया कि ओडिशा के कई जिलों में किडनी रोग के मामलों में असामान्य वृद्धि देखी गई है। इन मरीजों में पाए जाने वाले लक्षण छत्तीसगढ़ के CKDu प्रभावित क्षेत्रों के मरीजों से मिलते-जुलते हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच समन्वित अनुसंधान के माध्यम से बीमारी के कारणों की पहचान, रोकथाम और प्रभावी उपचार की दिशा में काम किया जाएगा।
शोध के निष्कर्षों को स्वास्थ्य नीति से जोड़ने पर जोर
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह समझौता केवल अकादमिक शोध पत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उद्देश्य शोध के निष्कर्षों को व्यावहारिक स्वास्थ्य रणनीतियों और जनहितकारी नीतियों में परिवर्तित करना है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इस साझेदारी का दायरा सिकल सेल रोग सहित अन्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान तक भी विस्तारित किया जाएगा। इससे आम नागरिकों को सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
दोनों संस्थानों के शोधकर्ता रहे मौजूद
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान दोनों संस्थानों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और शोधकर्ता मौजूद रहे। एम्स रायपुर की ओर से डीन (अकादमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा, एसोसिएट डीन (रिसर्च) डॉ. एकता खंडेलवाल, डॉ. पुगझेंथन थंगराजू, डॉ. विराट गहलोतरा, डॉ. सुप्रवा पटेल, डॉ. विनय राठौर और डॉ. नीलम देवी मरावी उपस्थित रहे।
संबलपुर विश्वविद्यालय की ओर से उप पंजीयक (अकादमिक) डॉ. ईश्वर बैथारू तथा शोधार्थी प्रलय बिस्वास और सावन कुमार साहू ने सहभागिता की।
यह साझेदारी छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती एवं प्रभावित क्षेत्रों में क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याओं की वैज्ञानिक समझ विकसित करने तथा शोध आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




