17.82 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ, 800 करोड़ से ज्यादा खर्च; ढाई साल में श्रमिक कल्याण को मिली नई रफ्तार

श्रमिकों के पंजीयन से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक बदलाव: 12.65 लाख नए पंजीयन, महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता और आवास के लिए 1.50 लाख रुपए तक की मदद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं के लाभ को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने पर जोर दिया है। श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने तकनीकी नवाचार और ऑनलाइन सेवाओं के जरिए श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाई है।
12.65 लाख नए श्रमिक जुड़े, 17.82 लाख को मिला लाभ
1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच करीब 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करीब 17.82 लाख श्रमिकों को लाभान्वित किया गया। इन योजनाओं पर 800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए। निर्माण श्रमिकों को करीब 780 करोड़ और असंगठित श्रमिकों को करीब 187 करोड़ रुपए की सहायता दी गई। हितलाभ की राशि सीधे खातों में पहुंचाने के लिए डीबीटी व्यवस्था लागू की गई है।
सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय
श्रमिकों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत किया गया है। नए जिलों में श्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 20 पदों का सृजन किया गया। वर्तमान में 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं। इस तरह प्रदेश के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है।
घर के पास मिल रही सरकारी सेवाएं
श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्रों को 24 घंटे, सातों दिन संचालित किया जा रहा है। मोबाइल शिविरों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। विभाग ने ऑनलाइन सेवाओं के लिए ‘श्रममेव जयते’ मोबाइल एप और वेबसाइट भी विकसित की है।
आवास सहायता बढ़कर 1.50 लाख रुपए
श्रमिक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए की गई है। इसके अलावा मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के जरिए श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है।
1.60 लाख से ज्यादा महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता
महिला श्रमिकों के लिए संचालित मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता दी गई है। वहीं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को केवल 5 रुपए में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
रोजगार के साथ अधिकारों पर भी जोर
श्रम विभाग ने रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा, फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने और दुकानों एवं स्थापना अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे फैसलों से उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
श्रमिक कल्याण से बनी नई पहचान
प्रदेश सरकार का जोर अब श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शिता और तकनीकी सुविधा से जोड़ने पर है। पिछले ढाई वर्षों में किए गए प्रयासों ने लाखों श्रमिक परिवारों तक सहायता पहुंचाई है। सरकार का दावा है कि इन पहलों से छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए एक नई पहचान मिली है।


