शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर जोर, सरस्वती शिशु मंदिरों की वार्षिक कार्ययोजना बैठक संपन्न

शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर जोर, सरस्वती शिशु मंदिरों की वार्षिक कार्ययोजना बैठक संपन्न
जांजगीर-चांपा। जिला जांजगीर-चांपा के सरस्वती शिशु मंदिरों के प्राचार्य एवं प्रधानाचार्यों की तीन दिवसीय वार्षिक कार्ययोजना बैठक का समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता इंजीनियर रवि पाण्डेय ने कहा कि यह बैठक महज औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में निर्मित होता है और विद्यालय की आत्मा शिक्षक एवं प्राचार्य होते हैं। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और संस्कार निर्माण का सशक्त माध्यम है। इसी कारण सरस्वती शिशु मंदिरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यहां शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और संस्कारों का समन्वय किया जाता है।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप नागरिक निर्माण पर जोर
मुख्य वक्ता एवं सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रतनलाल चक्रधर ने छत्तीसगढ़ प्रांत में संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों की शैक्षणिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप सरस्वती शिशु मंदिरों का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो आत्मनिर्भर, नैतिक, नवाचारी और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।
इनकी रही प्रमुख भूमिका
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सरस्वती ग्राम शिक्षा विकास समिति, जिला जांजगीर-चांपा के सचिव देव प्रसाद तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत भैंसदा के सरपंच प्रतिनिधि राजेश सिंह बनाफर ने की। बैठक का संचालन जिला समन्वयक नवल किशोर तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रधानाचार्य मनीष सिंह बनाफर ने किया।
इस अवसर पर जिला समिति अध्यक्ष कोमल सिंह ठाकुर, प्रांतीय समिति के पूर्व कोषाध्यक्ष कमल देवांगन, बद्री प्रसाद केशरवानी, जिला समिति उपाध्यक्ष देव भूषण सिंह, जिला समिति सदस्य श्रीमती रौशनी राठौर, संकुल प्रमुख तीजराम कौशिक, हीराराम सूर्यवंशी सहित सरस्वती शिशु मंदिरों के आचार्य एवं दीदी उपस्थित रहे।



