एनआईटी रायपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइंटिफिक कंप्यूटिंग पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

एनआईटी रायपुर के सीएसई और आईटी विभाग द्वारा सतत शिक्षा प्रकोष्ठ (CEC) के सहयोग से किया जा रहा है आयोजन

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में आज “नेक्स्ट जेनरेशन ट्रेंड्स इन एआई एंड साइंटिफिक कंप्यूटिंग विद हैंड्स-ऑन यूज़िंग पाइथन” विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया गया। 20 से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली यह कार्यशाला कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सतत शिक्षा प्रकोष्ठ (सीईसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वैज्ञानिक संगणना के क्षेत्र में सैद्धांतिक समझ और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी ने की। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष (प्रभारी) डॉ. संजय कुमार, सतत शिक्षा प्रकोष्ठ (सीईसी) के अध्यक्ष डॉ. शुभोजीत घोष तथा मुख्य वक्ता के रूप में आईआईटी रोपड़ के स्कूल ऑफ एआई एंड डेटा इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार विप्पार्थी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. सोनल यादव एवं डॉ. अनीता मुर्मू द्वारा किया जा रहा है, जबकि डॉ. राजेश डोरिया कार्यशाला के संयोजक हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. समीर बाजपेयी ने उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और उद्योग की समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनआईटी रायपुर तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुसार लगातार ऐसे उच्च स्तरीय कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
मुख्य वक्ता डॉ. संतोष कुमार विप्पार्थी ने अपने वक्तव्य में कहा कि एआई आज वैश्विक स्तर पर हर क्षेत्र को बदल रहा है। उन्होंने मानव जीवन को सरल बनाने में एआई की क्षमता को रेखांकित करने के साथ ही इसके जिम्मेदार व नैतिक उपयोग और शोधकर्ताओं में रचनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया।
इससे पूर्व, स्वागत भाषण में डॉ. अनीता मुर्मू ने स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. सोनल यादव ने बताया कि पाइथन आधारित व्यावहारिक सत्र वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं को हल करने में मददगार होंगे। डॉ. संजय कुमार और डॉ. शुभोजीत घोष ने भी सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला नवागंतुकों से लेकर अनुभवी शोधकर्ताओं, दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी होगी।


