G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhINDIARaipurखास-खबर

छत्तीसगढ़ की पर्यटन छटा से अभिभूत हुईं भारत सरकार की पूर्व पर्यटन महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा

14 दिवसीय यात्रा में प्रकृति, संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और जनजातीय जीवन का किया अनुभव, कहा— हर पर्यटक की यात्रा सूची में होना चाहिए छत्तीसगढ़

रायपुर, 15 जुलाई 2026। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक धरोहरों और आत्मीय आतिथ्य की मुक्तकंठ से सराहना की। 14 दिवसीय यात्रा के बाद उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर राज्यों में से एक है तथा यह हर पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि यहां की प्राकृतिक संपदा, घने जंगल, भव्य जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार छत्तीसगढ़ को देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में शामिल करता है।

रायपुर से शुरू हुई सांस्कृतिक यात्रा

श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन और जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं को करीब से जाना। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्रों का भ्रमण किया। उन्होंने भोरमदेव परिसर को भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण बताया।

अमरकंटक में आध्यात्मिक अनुभव

यात्रा के दौरान उन्होंने अमरकंटक में मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा और कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्भुत संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन भी किए।

बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति ने किया प्रभावित

बस्तर प्रवास के दौरान उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर और तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

उन्होंने मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल और स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस और लकड़ी की कलाकृतियों की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प वैश्विक पहचान बनाने की पूरी क्षमता रखता है।

कांगेर घाटी और साहसिक पर्यटन की सराहना

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग और केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और एडवेंचर पर्यटन के शौकीनों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार और कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया तथा बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार की जरूरत

अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ने का अवसर भी है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है, जहां पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश के कम चर्चित लेकिन अत्यंत आकर्षक पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अग्रणी स्थान हासिल कर सकता है। उन्होंने राज्य में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।

श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आह्वान करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार इस राज्य की यात्रा करेगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन और आत्मीय आतिथ्य की अविस्मरणीय यादें जीवनभर अपने साथ लेकर जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page