पिछड़ा वर्ग आयोग की सुनवाई में कई मामलों का निराकरण, मलार समाज ने ओबीसी में शामिल करने की मांग उठाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों और आवेदनों पर शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। आयोग के अध्यक्ष नेहरू राम निषाद, उपाध्यक्ष चन्द्रकान्ति वर्मा तथा सचिव संकल्प साहू की उपस्थिति में मामलों की समीक्षा की गई। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
सुनवाई के दौरान सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर और जशपुर से आए मलार समाज के 50 से 60 प्रतिनिधियों ने समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल किए जाने की मांग करते हुए सामूहिक आवेदन सौंपा। प्रतिनिधियों ने इस संबंध में लिखित समर्थन भी प्रस्तुत किया। आयोग ने प्रकरण का अवलोकन कर अधिकारियों को नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
गरियाबंद जिले के ग्रामीण साहू संघ (मुरमुरा) के पदाधिकारी हरिशंकर साहू के सामाजिक बहिष्कार संबंधी मामले में आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि आवेदक को पुनः समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक शामिल कर लिया गया है और इसका प्रमाण-पत्र भी आयोग को सौंपा गया।
जागेश्वर यदु द्वारा भू-अधिग्रहण के बदले मिली नौकरी से सेवा समाप्त किए जाने की शिकायत पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर के अधिकारियों ने बताया कि यह मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के अधिकार क्षेत्र का है। आयोग ने आवेदक को कैट के समक्ष आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने की सलाह दी।
प्रदीप जायसवाल ने छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी में पदों की समतुल्यता और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मुद्दे आयोग के समक्ष रखे। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने क्रीमीलेयर एवं समतुल्यता निर्धारण के संबंध में राज्य शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
रामसुन्दर का बयान दर्ज किया गया, लेकिन अनावेदक की अनुपस्थिति के कारण मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई। चूंकि मामला आपसी विवाद और मारपीट से संबंधित था, इसलिए आयोग ने आवेदक को संबंधित पुलिस थाने में नियमानुसार शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। वहीं अंबिका प्रसाद, फगुन दास और जोगेश्वरी वर्मा की अनुपस्थिति के कारण उन्हें अगली पेशी में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
सुनवाई के अंत में आयोग के अध्यक्ष नेहरू राम निषाद और उपाध्यक्ष चन्द्रकान्ति वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछड़ा वर्ग से जुड़े सभी मामलों का समय-सीमा के भीतर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निराकरण सुनिश्चित किया जाए।


