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पलायन से ‘लखपति दीदी’ बनने तक: राजकुमारी साहू की प्रेरक सफलता


बिहान योजना से मिली नई राह, आइसक्रीम व्यवसाय से सालाना तीन लाख रुपये से अधिक की आय

रायपुर, 27 जून। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम बिलासपुर की रहने वाली राजकुमारी साहू ने संघर्ष और आत्मविश्वास के दम पर अपनी जिंदगी बदल दी है। कभी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर राजकुमारी आज छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की मदद से सफल उद्यमी बनकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

अभावों से आत्मनिर्भरता तक का सफर

आर्थिक तंगी के कारण राजकुमारी साहू को परिवार सहित दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जाना पड़ा। वहां कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने अपने परिवार के बेहतर भविष्य का सपना संजोया। गांव लौटने के बाद ‘बिहान’ योजना से जुड़कर उन्होंने महिलाओं को संगठित किया और 10 महिलाओं के साथ ‘जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह’ का गठन किया। प्रति माह 100 रुपये की बचत से शुरू हुआ यह प्रयास आगे चलकर सफल उद्यम का आधार बना।

हुनर बना रोजगार का माध्यम

दूसरे राज्यों में मजदूरी के दौरान सीखी आइसक्रीम और कुल्फी बनाने की कला को राजकुमारी ने अपने व्यवसाय का आधार बनाया। समूह को ‘बिहान’ योजना के तहत 1.50 लाख रुपये का बैंक ऋण और 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्होंने घर पर ही मटका कुल्फी, आइसक्रीम और बादाम शेक जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई और आज उनका व्यवसाय बिलाईगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में अच्छी पहचान बना चुका है।

तीन लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय

राजकुमारी साहू और उनका स्व-सहायता समूह वर्तमान में आइसक्रीम व्यवसाय से सालाना तीन लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है।

बनीं ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा

राजकुमारी साहू आज एक सफल उद्यमी होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है और यह साबित करती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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