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बेमेतरा में खुलेगी प्रदेश की पहली आधुनिक खुली जेल, बंदियों के सुधार और पुनर्वास को मिलेगा नया आयाम

रायपुर, 14 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में आधुनिक खुली जेल की स्थापना का आदेश जारी कर दिया है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री श्री विजय शर्मा के अनुमोदन के बाद जेल विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की। सरकार का उद्देश्य बंदियों को दंड के साथ-साथ सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर प्रदान करना है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि जेल विभाग अपनी मूल अवधारणा के अनुरूप बंदियों के सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी कार्य करेगा। वहीं, महानिदेशक जेल श्री हिमांशु गुप्ता ने बताया कि खुली जेल का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा, सामाजिक पुनर्स्थापन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

200 बंदियों की क्षमता वाली आधुनिक जेल

ग्राम पथर्रा में लगभग 10.20 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आधुनिक खुली जेल में करीब 200 बंदियों के रहने की व्यवस्था होगी। परिसर में गुणवत्तापूर्ण आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जेल और सुरक्षा कर्मियों के लिए भी आवासीय क्वार्टर एवं बैरक बनाए गए हैं।

चारदीवारी नहीं, विश्वास और जिम्मेदारी का मॉडल

खुली जेल की विशेषता यह होगी कि यहां बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा। सीमित निगरानी के बीच उन्हें सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा। बंदी गौशाला, डेयरी, सब्जी उत्पादन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब एवं ट्यूब लाइट निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई, मुर्गी पालन सहित विभिन्न कुटीर उद्योगों में कार्य कर सकेंगे। हालांकि उन्हें जेल विभाग द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

अच्छे आचरण वाले आजीवन कारावास के बंदियों को मिलेगा अवसर

प्रारंभिक चरण में ऐसे आजीवन कारावास प्राप्त बंदियों को खुली जेल में रखा जाएगा, जिन्होंने 11 वर्ष या उससे अधिक की सजा पूरी कर ली हो और जेल में उत्कृष्ट आचरण प्रदर्शित किया हो। ऐसे बंदियों का चयन किया जाएगा जिनके दोबारा गंभीर अपराध करने की संभावना न हो तथा जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि सकारात्मक हो। अंतिम चयन महानिदेशक जेल की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।

कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार पर रहेगा जोर

खुली जेल में बंदियों को मछली पालन, कुक्कुट पालन, पशुपालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन, काष्ठ कला, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सिलाई, बुनाई, बुक बाइंडिंग, प्रिंटिंग और कंप्यूटर संचालन जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। रिहाई के बाद व्यवसाय शुरू करने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

‘आस्था कैफे’ और एंपोरियम से होगा समाज से जुड़ाव

बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर जिला प्रशासन के सहयोग से ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप संचालित किए जाएंगे, जहां बंदी कार्य कर सकेंगे। वहीं खुली जेल परिसर के मुख्य द्वार पर स्थापित एंपोरियम में बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री की जाएगी, जिससे उन्हें आय अर्जित करने के साथ समाज से सकारात्मक जुड़ाव का अवसर मिलेगा।

सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि खुली जेल व्यवस्था बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, परिवार से बेहतर संबंध, सामाजिक जिम्मेदारी की भावना और सम्मानजनक पुनर्वास को बढ़ावा देगी। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुधारात्मक एवं मानवीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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